गाजियाबाद। केंद्र व प्रदेश सरकार की मंशा पर स्थानीय चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी पानी फेर रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किये गये निश्शुल्क टीकाकरण की जिले की रिपोर्ट अच्छी नहीं है। जिला स्वास्थ्य समिति को भेजी गई 27 मई तक की रिपोर्ट के अनुसार किसी केंद्र पर एक तो किसी पर केवल दो किशोरियों का ही टीकाकरण हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग एचपीवी टीकाकरण में रूचि न लेने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। ऐसे केंद्रों की सूची बना ली गई है जहां पर एचपीवी टीकाकरण से स्थानीय किशोरियां दूर हैं। सर्विकल कैंसर से बचाव को शुरू किये गये एचपीवी टीकाकरण की गति बेहद धीमी हैं। 40 हजार के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक एक हजार किशोरियों को भी टीका नहीं लगा है।
विभाग 14 वर्षीय किशोरियों को टीकाकरण केंद्र तक लाने में असफल हो रहा है। स्कूलों में भी कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। जिले में पहली बार सर्विकल कैंसर से बचाव को 14 वर्षीय किशोरियों का निश्शुल्क एचपीवी टीकाकरण 11 मार्च को जिला महिला अस्पताल में शुरू किया गया था। इसके बाद पूरे जिले में वैक्सीन उपलब्ध कराई गई।
27 मई तक की रिपोर्ट के अनुसार सबसे कम टीका लगाने वाले केंद्र
केंद्र किशोरी
- यूपीएचसी बुलंदशहर रोड़ औद्योगिक क्षेत्र 1
- यूपीएचसी कैलाभट्टा 1
- यूपीएचसी विजयनगर-2 2
- यूपीएचसी घूकना 2
- यूपीएचसी सद्दीकनगर 2
- यूपीएचसी शालीमार गार्डन 4
- यूपीएचसी वेद विहार 5
- यूपीएचसी भोपुरा 7
- यूपीएचसी करहैडा 9
- यूपीएचसी विजयनगर-1 8
- यूपीएचसी साधना एन्क्लेव खोड़ा 9
- यूपीएचसी सरस्वती कालोनी 10
- यूपीएचसी मकनपुर 11
- यूपीएचसी वसुंधरा 11
- यूपीएचसी खोड़ा गांव 12
- यूपीएचसी कार्टे शास्त्रीनगर 12
- यूपीएचसी शहीदनगर 14
एचपीवी टीकाकरण को गति देने के लिये योजना बना ली गई है। इसका प्रचार प्रसार कराने की तैयारी है। टीके को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिय लोगों के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे।
स्कूलों में किशोरियों को टीका लगाने से पहले अभिभावकों की लिखित सहमति जरूरी है। इसी के चलते टीकाकरण प्रभावित हो रहा है। कम टीकाकरण वाले केंद्रों पर तैनात चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को सख्त निर्देश दिये हैं कि क्षेत्र में जाकर लोगों को एचपीवी के प्रति जागरूक करें। रूचि ने लेने वालों पर कार्रवाई की जायेगी।

