गाजियाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर 86 हजार लोगों का फीडबैक, 34 शिकायतों ने खोली लापरवाही की पोल

News Desk
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गाजियाबाद। पुलिस की कार्यप्रणाली और नागरिकों को दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता परखने के लिए कमिश्नरेट की फीडबैक सेल ने इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक 86 हजार लोगों से फीडबैक लिया। पुलिस का दावा है कि इनमें से केवल 34 फीडबैक नकारात्मक मिले।

कुल फीडबैक में नकारात्मक प्रतिक्रियाओं की हिस्सेदारी 0.039 प्रतिशत रही। नकारात्मक फीडबैक मिलने पर मामलों की जांच कराई गई। जांच के आधार पर 30 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के खिलाफ लाइन हाजिर और निलंबन की कार्रवाई की गई।

हर महीने करीब 12 हजार लोगों से लिया फीडबैक

डीसीपी मुख्यालय धवल जायसवाल के मुताबिक बीते वर्ष मई में फीडबैक सेल के जरिए पुलिस की सेवाओें में सीधे जनता से फीडबैक लेना शुरू कराया गया था। बीते वर्ष मई से इस वर्ष जुलाई तक एफआइआर पंजीकरण, चरित्र सत्यापन, जनशिकायत और पासपोर्ट सत्यापन से संबंधित कुल 1.56 लाख फीडबैक मिले। इनमें 81 नकारात्मक थे।

सबसे अधिक 44 नकारात्मक फीडबैक जनशिकायत के मामलों से संबंधित रहे। वहीं पासपोर्ट सत्यापन के संबंध में 23 नकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं। नकारात्मक फीडबैक को गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रकरणों की जांच कराई गई। जहां पुलिसकर्मियों की लापरवाही, उदासीनता या कर्तव्य निर्वहन में अनियमितता मिली, वहां लाइन हाजिर और निलंबन समेत दंडात्मक कार्रवाई की गई।

नकारात्मक प्रतिक्रिया का असर, रुपये मांगने पर दारोगा और सिपाही निलंबित

नाबालिग की बरामदगी के मामले में पीड़ित स्वजन से रुपये मांगना नंदग्राम थाने में तैनात दारोगा इंद्रेश कुमार को भारी पड़ गया। शिकायत मिलने के बाद कराई गई जांच में आरोप सही पाए जाने पर दारोगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

पुलिस के अनुसार दारोगा पर नाबालिग की बरामदगी के संबंध में पीड़ित स्वजन से रुपये मांगने का आरोप लगा था। शिकायत की जांच कराई गई, जिसमें आरोपों की पुष्टि होने पर विभागीय कार्रवाई की गई। इसी तरह वेव सिटी थाने में तैनात मुख्य आरक्षी आबिद के खिलाफ भी शिकायत में रुपये मांगने का आरोप लगा।

उसके विरुद्ध भी जांच कराई गई और प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई। डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि दोनों मामलों में फीडबैक सेल के जरिए वादी से फीडबैक लिया गया था।

उसके आधार पर जांच कराई गई। पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार या कर्तव्य में लापरवाही की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच में आरोप सही मिलने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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