दक्षिणी दिल्ली। राजधानी के ट्रैफिक में चलना किसी दुरूह कार्य से कम नहीं। पैदल चलना उससे भी बड़ा जोखिम। हालांकि पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ बने हैं, जो उनका अधिकार भी है। पर अतिक्रमण के चलते ये कई जगह सिमट गए हैं तो कई जगह पर पैदल वालों के अधिकारों पर डाका भी डाल दिया गया है।
घनी आबादी वाले इलाकों और कालोनियों में जहां फुटपाथ पर पैदल चलने की जगह भी मुश्किल से है, वहां ईवी चार्जिंग स्टेशन और बैट्री स्वैपिंग सेंटर बनाए जा रहे हैं। स्थिति यह कि सड़क पर वाहन खड़ा कर चार्जिंग करने से जाम की समस्या बढ़ रही है।
बनी रहती है दुर्घटना की आशंका
दूसरी ओर पैदल चलने के लिए फुटपाथ भी नहीं मिल रहा है। वहीं सड़क पर पैदल चलने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। जामिया से मोदी मिल मार्ग पर सुखदेव विहार लाल बत्ती पर भी फुटपाथ पर ही चार्जिंग स्टेशन बनाया है।
फुटपाथ पर ही लोग वाहनों को पार्क कर चार्ज करते हैं। इसके चलते पीक समय में जहां जाम लगते हैं, वहीं छात्रों और स्थानीय निवासियों को पैदल चलने में दुश्वारी होती है। वर्तमान में दिल्ली में 8998 चार्जिंग प्वाइंट हैं, जबकि आवश्यकता 36,177 तक की है।
सरकार दिसंबर तक चार्जिंग प्वाइंट की संख्या 16,070 तक बढ़ाने में लगी है। सार्वजनिक उपक्रम और निजी बिजली कंपनियों को ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने अनुमति दी गई है।
सार्वजनिक पार्किंग में भी चार्जिंग स्टेशन बनाने की छूट
वहीं, एमसीडी ने अलग-अलग हिस्सों में जमीन उपलब्ध कराने के साथ सार्वजनिक पार्किंग में भी चार्जिंग स्टेशन बनाने की छूट दी है। मेट्रो स्टेशनों के आस-पास चार्जिंग स्टेशन बनाने में दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड सहयोग कर रहा है।
ट्रांसको के मुताबिक जहां भी स्टेशन बनाए जाते हैं, वहां वाहनों को खड़ा करने की जगह का ध्यान रखा जाता है। वहीं बीएसईएस के एक अधिकारी के मुताबिक आरडब्ल्यूए या एमसीडी की मांग के अनुसार उनकी ओर से उपलब्ध स्थान पर ही चार्जिंग स्टेशन बनाया जाता है।

