6 बिल्डर्स के खिलाफ EOW ने शुरू की जांच: बायर्स का पैसा कहां गया, होगी पड़ताल, नोएडा प्राधिकरण से मांगे दस्तावेज

News Desk
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नोएडा। प्राधिकरण में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने छह प्रमुख बिल्डरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। प्राधिकरण की शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू ने इन बिल्डरों से संबंधित दस्तावेजों की सेक्टर-96 स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन में ग्रुप हाउसिंग में संपर्क कर मांगा गया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि फ्लैट खरीदारों से वसूला गया धन किस प्रकार खर्च किया गया। आशंका है कि इस राशि को परियोजनाओं में लगाने के बजाय अन्य परियोजनाओं या माध्यमों में स्थानांतरित किया गया है।

प्राधिकरण देगा ईओडब्ल्यू को दस्तावेज

प्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार जिन छह बिल्डरों के खिलाफ ईओडब्ल्यू को पत्र भेजा गया है। उन बिल्डरों की जानकारी ग्रुप हाउसिंग विभाग से मांगी है, इसमें भूमि आवंटन, लीज डीड, भुगतान, बकाया, परियोजना की प्रगति और अन्य रिकार्ड मांगे गए हैं। प्राधिकरण जल्द ही सभी दस्तावेज ईओडब्ल्यू को उपलब्ध कराएगा, जिससे जांच की गति बढ़ेगी।

आर्थिक अपराध शाखा कर रही जांच

यह बिल्डर वे हैं जिन्होंने राज्य सरकार की ओर से लागू अमिताभकांत समिति की सिफारिशों के तहत राहत योजना का लाभ नहीं उठाया। न तो उन्होंने बकाया निपटाने में रुचि दिखाई और न ही प्राधिकरण की बैठकों में भाग लिया। कई नोटिस जारी होने के बावजूद संतोषजनक उत्तर न मिलने पर प्राधिकरण ने आर्थिक अपराध शाखा से वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराने का निर्णय लिया है।

हवाला कनेक्शन के खंगार रहे कनेक्शन

जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि खरीदारों से वसूले गए हजारों करोड़ रुपये का उपयोग संबंधित परियोजनाओं में हुआ या उसे अन्य कंपनियों या वित्तीय माध्यमों में स्थानांतरित किया गया। आवश्यकता पड़ने पर धन के प्रवाह और संभावित हवाला कनेक्शन की भी जांच की जा सकती है।

4,300 फ्लैटों की रजिस्ट्री

नोएडा प्राधिकरण अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी से बताया कि जिन बिल्डरों ने अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के तहत राहत योजना अपनाई है, वहां फ्लैट खरीदारों को राहत मिलने लगी है। अब तक इस व्यवस्था के तहत लगभग 4,300 फ्लैटों की रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं, जबकि बिल्डरों ने लगभग 800 करोड़ रुपये प्राधिकरण में जमा किए हैं।

बिल्डरों की जांच में शामिल

  • एसोटेक लिमिटेड : सेक्टर-78 के जीएच-04ए भूखंड का आवंटन 27 जुलाई 2010 को किया गया था। प्रारंभिक किस्तें जमा करने के बाद बिल्डर ने भुगतान बंद कर दिया है, जिससे प्राधिकरण का करीब 88 करोड़ रुपये बकाया है।
  • जीएसएस प्रोकान प्राइवेट लिमिटेड : सेक्टर-143 बी के जीएच-1 सी भूखंड का आवंटन 10 अगस्त 2010 को हुआ था। कई नोटिसों के बावजूद बिल्डर ने बकाया जमा नहीं किया है, जिससे प्राधिकरण का करीब 90.54 करोड़ रुपये बकाया है।
  • ग्रेनाइट गेट प्रापर्टीज प्राइवेट लिमिटेड : इस बिल्डर की नोएडा में दो परियोजनाएं हैं, जिन पर मिलाकर प्राधिकरण का 1,589.27 करोड़ रुपये बकाया है।
  • शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड : सेक्टर-137 के जीएच-05 भूखंड का आवंटन 23 मार्च 2010 को हुआ था। बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद न तो बकाया जमा किया गया और न ही परियोजना का निर्माण पूरा किया गया है।
  • आईवीआर प्राइम डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड : सेक्टर-118 के ग्रुप हाउसिंग भूखंड का आवंटन 18 अप्रैल 2007 को हुआ था। कई नोटिसों के बावजूद 500 करोड़ रुपये बकाया जमा नहीं किया गया है।
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