उत्तर भारत में फार्मा की आड़ में नशे का कारोबार, छह राज्यों में ईडी की छापेमारी से बड़ा नेटवर्क उजागर

Amit
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ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसे ड्रग्स की अवैध सप्लाई में छह फार्मा कंपनियों की भूमिका; मनी लॉन्ड्रिंग के भी मिले पुख्ता सबूत

जालंधर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जालंधर शाखा ने उत्तर भारत में फैले एक व्यापक ड्रग्स तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का खुलासा किया है। ईडी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई 17 से 19 जून के बीच छह राज्यों में फैले 16 ठिकानों पर की गई।

यह नेटवर्क फार्मास्युटिकल कंपनियों की आड़ में नशीली दवाओं की आपूर्ति कर रहा था, जिनमें मुख्य रूप से ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसे प्रतिबंधित साइकोट्रॉपिक पदार्थ शामिल हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इन दवाओं को बाजार में भारी मुनाफे पर अवैध रूप से बेचा जा रहा था।

ईडी ने छह फार्मा कंपनियों से जुड़े 22 लोगों के ठिकानों पर छापे मारे, जिनमें उनके कार्यालय, गोदाम, आवास और सप्लाई चेन से जुड़े केंद्र शामिल थे। अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में डिजिटल डाटा, मोबाइल फोन, लैपटॉप और जानबूझकर मिटाए गए रिकॉर्ड के अवशेष बरामद किए हैं।

ईडी को मिली जानकारी के अनुसार, इन कंपनियों ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए जाली दस्तावेजों और शेल कंपनियों का भी इस्तेमाल किया। जिन कंपनियों की जांच फिलहाल प्राथमिकता पर है, उनमें शामिल हैं:

  • मेसर्स बॉयोजेनेटिक ड्रग्स प्राइवेट लिमिटेड
  • मेसर्स सीबी हेल्थकेयर
  • मेसर्स सिमिलाक्स फार्माकेम ड्रग्स इंडस्ट्रीज
  • मेसर्स एस्टर फार्मा
  • मेसर्स सॉल हेल्थकेयर प्रा. लि.
  • और एलेक्स पालिवाल व सहयोगी

अधिकारियों का कहना है कि मनी ट्रेल की जांच के लिए इन कंपनियों के बैंक खातों की गहन समीक्षा की जा रही है और कुछ अन्य नामी फार्मा ब्रांड्स भी जांच के दायरे में हैं।

ईडी सूत्रों का मानना है कि यह गिरोह वर्षों से काम कर रहा था और अब तक बचता रहा क्योंकि इसे फार्मा व्यापार के वैध आवरण के नीचे छिपाया गया था। आगे की जांच में कई और नाम सामने आने की उम्मीद है, जो उत्तर भारत में मादक पदार्थों की काली मंडी से जुड़े हो सकते हैं।

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