नई दिल्ली- दिल्ली हाईकोर्ट ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) से जुड़े मामले में अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि फिलहाल बैंक की ओर से जारी शो कॉज नोटिस पर रोक नहीं लगाई जाएगी। अदालत ने आरएचएफएल के निदेशक जय अनमोल अंबानी को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर बैंक के समक्ष अपना पक्ष रखें।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि इस स्तर पर न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेगा और याचिकाकर्ता को पहले बैंक के समक्ष जवाब देने का अवसर दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि बैंक इस मामले में जो भी अंतिम निर्णय लेगा, वह हाईकोर्ट की निगरानी और आगे आने वाले आदेशों के अधीन रहेगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने निर्देश दिया कि जय अनमोल अंबानी दस दिनों के भीतर शो कॉज नोटिस का विस्तृत जवाब दाखिल करें। इसके बाद 30 जनवरी को बैंक की ओर से उन्हें या उनके अधिकृत प्रतिनिधि को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। सुनवाई के बाद बैंक को कारण सहित आदेश पारित करना होगा, जिसे अगली तारीख पर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि बैंक द्वारा जारी नोटिस कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि आरएचएफएल की समाधान योजना को पहले ही सभी कर्जदाता बैंकों और सर्वोच्च न्यायालय से मंजूरी मिल चुकी है, ऐसे में कंपनी को धोखाधड़ी की श्रेणी में रखना तर्कसंगत नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि जिन तथ्यों के आधार पर नोटिस जारी किया गया है, उनकी जानकारी बैंक को वर्ष 2020 से थी और इतने लंबे अंतराल के बाद कार्रवाई करना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।
वहीं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि शो कॉज नोटिस केवल प्रारंभिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इस स्तर पर अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि जब दिवालियापन कानून के तहत समाधान योजना को स्वीकृति मिल चुकी है, तब बाद में इस तरह की कार्रवाई किस आधार पर की गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाना जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में बैंक को फटकार लगाई थी और बिना उचित नोटिस दिए बैंक खाते को धोखाधड़ी घोषित करने की प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। उस समय अदालत ने पाया था कि नोटिस ऐसे पते पर भेजा गया था, जिसे कंपनी वर्षों पहले छोड़ चुकी थी।
