दिल्ली- नई दिल्ली में हुए लालकिला धमाके की जांच ने सुरक्षा एजेंसियों को कई नए सुरागों तक पहुँचाया है। जांचकर्ताओं को मिले डिजिटल साक्ष्यों से पता चला है कि हमले की योजना केवल स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं थी, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के बीच बढ़ते तालमेल से जुड़े हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कुछ ऐसे वीडियो और दस्तावेज़ बरामद हुए हैं जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि दक्षिण एशिया में सक्रिय आतंकी संगठन एक-दूसरे से संपर्क में थे और हमलों की रणनीति साझा कर रहे थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस हमले की रूपरेखा कई महीने पहले तैयार की गई थी और अब पूरी साजिश धीरे-धीरे सामने आ रही है।
एजेंसियों को शक है कि एक सफेदपोश आतंकी नेटवर्क ने तकनीक और संसाधनों का इस्तेमाल कर हमले को अंजाम देने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इस मॉड्यूल के सदस्य देश के कई राज्यों में फैले हुए थे और अस्पतालों व शैक्षणिक संस्थानों की आड़ लेकर गतिविधियां चला रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि आधुनिक हथियारों की तस्करी और ड्रोन के उपयोग से जुड़े कई पैटर्न पहले भी कुछ वैश्विक आतंकी संगठनों द्वारा अपनाए गए थे। एजेंसियों के अनुसार, इसी तरह के तरीकों का उपयोग इस मॉड्यूल द्वारा भी किया गया, जिससे दोनों के बीच संभावित संबंधों की जांच तेज हो गई है।
फरीदाबाद, नूंह और हरियाणा के कुछ अन्य इलाकों से रसायन व उपकरण खरीदने के बारे में मिले सुरागों के बाद, स्थानीय पुलिस ने इन क्षेत्रों में भी छानबीन बढ़ा दी है। कई दुकानों और गोदामों की जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि हमले में इस्तेमाल सामग्री कहां-कहां से आई।
इस बीच, एक निजी विश्वविद्यालय से जुड़े स्टाफ और छात्रों की जांच भी जारी है। कई लोगों के अचानक गायब होने के बाद एजेंसियों ने उनके लॉकर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। अब तक बरामद मोबाइल व टैबलेट से मिले डेटा के आधार पर संपर्क सूत्रों की पहचान की जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि दिल्ली धमाके की परतें अब खुलनी शुरू हो गई हैं और जल्द ही इस पूरे नेटवर्क के अन्य चेहरों की भी पहचान संभव है।
