ग्रेटर नोएडा से अंतरिक्ष तक बेटियों की उड़ान, 108 देशों की छात्राएं तैयार कर रहीं दो सैटेलाइट

News Desk
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ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर को हाईटेक जिला कहा जाता है और अब यही जिला अंतरिक्ष में महिला सशक्तीकरण का सबसे बड़ा उदाहरण पेश करने जा रहा है।

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में चल रहे नौ दिवसीय मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में भारत समेत 108 देशों की 1200 छात्राएं एक साथ मिलकर दो सेटेलाइट तैयार कर रही हैं। इसमें से एक सेटेलाइट शक्तिसैट-लियो (लो अर्थ आर्बिट) को श्रीहरिकोटा से और दूसरा शक्तिसैट-मून को जापान की निजी अंतरिक्ष कंपनी आई-स्पेस से चांद के लिए लांच किया जाएगा।

विश्वविद्यालय परिसर में रविवार से शुरू हुए इस कार्यक्रम में देश-विदेश की छात्राओं का संगम देखने को मिल रहा है। 108 देशों में से 61 देशों की 142 छात्राएं कैंपस में पहुंची हैं, जबकि बाकी देशों छात्राएं आनलाइन माध्यम से इस मिशन से जुड़ी हैं। इन सभी छात्राएं कक्षा आठवीं से 12वीं कक्षा की हैं।

20 विशेषज्ञों के तैयार पाठ्यक्रम की पढ़ाई के बाद हुआ चयन

आयोजकों के मुताबिक इस मिशन में शामिल होना इतना आसान नहीं था। इसके लिए एक विशेष स्पेस डिप्लोमा कोर्स तैयार किया गया था। इस कोर्स को 20 विशेषज्ञों की टीम ने दो साल की मेहनत से तैयार किया है। यह कोर्स 1500 पन्नों का है, जिसमें 550 प्रैक्टिकल गतिविधियां और 120 घंटे की थ्योरी शामिल है।

यह पूरा कोर्स जोवो प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराया गया था। दुनिया भर के स्कूलों, विज्ञान शिक्षकों और स्पेस टेक्नोलाजी से जुड़े इंजीनियरों से संपर्क कर छात्राओं को इस कोर्स के लिए प्रेरित किया गया। कोर्स पूरा करने के बाद परीक्षा के जरिये 1200 छात्राओं का चयन किया गया है, जो अब सेटेलाइट असेंबलिंग का प्रशिक्षण ले रही हैं। यह कोर्स अंग्रेजी, फ्रेंच, पुर्तगाली और स्पेनिश भाषा में है।

तकनीकी सत्र और व्यावहारिक सत्र से दिया जाएगा प्रशिक्षण

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में 24 से 27 अगस्त तक टेक्निकल सत्र चलेंगे। इसमें छात्राओं को वैज्ञानिकों की देखरेख में सेटेलाइट डिजाइन, असेंबलिंग, प्रोग्रामिंग और लांचिंग की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। इसके बाद 28 अगस्त को एक फाइनल परीक्षा आयोजित होगी, जिसके बाद सभी छात्राओं को सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्पेस टेक्नोलाजी में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें कम उम्र में ही अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ना है। आयोजकों ने बताया कि शक्तिसैट-लियो लो अर्थ आर्बिट में स्थापित होगा, जो पृथ्वी से जुड़े डेटा कलेक्ट करेगा, जबकि शक्तिसैट-मून चंद्रमा की कक्षा के लिए भेजा जाएगा। 28 से 31 अगस्त तक सेटेलाइट बनाने पर कार्य किया जाएगा।

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