दिल्ली में बिजली संकट का खतरा! खपत 8,000 MW के पार; सरकार का सख्त आदेश- AC का तापमान 24-26 डिग्री रखें, जरूरत न होने पर लाइटें करें बंद

Amit
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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी की दस्तक के साथ ही बिजली की मांग ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ना शुरू कर दिया है। दिल्ली में पिछले करीब एक हफ्ते से बिजली की अधिकतम मांग 8,000 मेगावाट (MW) के पार बनी हुई है। मौसम विभाग और बिजली विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यह खपत 9,000 मेगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को भी पार कर सकती है।

बिजली की इस रिकॉर्ड-तोड़ मांग और संभावित संकट को देखते हुए दिल्ली सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। सरकार ने सभी विभागों के लिए बिजली की बर्बादी रोकने और ऊर्जा संरक्षण (Energy Conservation) के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

दफ्तरों के लिए सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की नई गाइडलाइंस

बिजली की भारी खपत को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने एक विशेष और विस्तृत आदेश जारी किया है। इस नए आदेश के तहत सरकारी दफ्तरों को निम्नलिखित नियमों का सख्ती से पालन करना होगा:

  • AC का तापमान तय: सभी सरकारी कार्यालयों में एयर कंडीशनर (AC) का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रखने के निर्देश दिए गए हैं।

  • लगेंगे मास्टर स्विच: कार्यालय परिसर, कमरों, गलियारों और सार्वजनिक क्षेत्रों में केवल जरूरत के मुताबिक ही लाइटें जलाई जाएंगी। गैर-जरूरी बिजली खपत को रोकने के लिए दफ्तरों में ‘मास्टर स्विच’ लगाए जाएंगे।

  • समय खत्म, उपकरण बंद: ऑफिस टाइमिंग खत्म होने के तुरंत बाद एसी, कूलर, पंखे, कंप्यूटर, प्रिंटर और फोटोकॉपी मशीनों को अनिवार्य रूप से बंद करना होगा।

ईंधन बचाने और ‘वर्क फ्रॉम होम’ पर भी जोर

वैश्विक परिस्थितियों और ईंधन की बढ़ती कीमतों को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर सरकार ने ऊर्जा और ईंधन दोनों की बचत के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। इसके अंतर्गत:

  1. हफ्ते में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम: सरकारी विभागों के ऊर्जा खर्च में कटौती करने के लिए कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम (Work From Home) करने की अनुमति दी जा रही है।

  2. पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल: ईंधन बचाने के उद्देश्य से मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को सरकारी वाहनों का उपयोग कम करने की सलाह दी गई है। इसके बजाय उन्हें मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन के साधनों का अधिक इस्तेमाल करने को कहा गया है।

सरकार का मानना है कि इन कदमों से न सिर्फ बिजली और ईंधन की भारी बचत होगी, बल्कि पीक सीजन में आम जनता को भी बिना किसी कटौती के निर्बाध बिजली सप्लाई मिल सकेगी।

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