नई दिल्ली। रोहिणी जेल में कैदियों और उनके स्वजन से रिश्वत वसूलने के मामले में विशेष न्यायाधीश की कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह किसी एक कर्मचारी द्वारा एक बार रिश्वत लेने का सामान्य मामला नहीं है, बल्कि जेल अधिकारियों और निजी लोगों ने मिलकर कार्टेल के रूप में काम किया।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपितों ने आपराधिक साजिश के तहत विचाराधीन कैदियों और उनके परिवारों पर दबाव बनाकर बार-बार बड़ी रकम वसूली।
जेल अधिकारियों और निजी लोगों ने बनाया कार्टेल
राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) एसीबी-01 विद्या प्रकाश ने यह टिप्पणी हेड वार्डर योगेश, सहायक अधीक्षक सुनील कुमार और निजी आरोपित हरेंद्र बंसल व विप्लव खारी की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए की।
अदालत ने कहा कि चारों आरोपितों की भूमिका पहले जमानत पा चुके आरोपितों से अलग और अधिक गंभीर है। जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है। कई गवाहों और संबंधित विचाराधीन कैदियों से पूछताछ बाकी है, जबकि जब्त डिजिटल और इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों की विधि विज्ञान प्रयोगशाला रिपोर्ट भी अभी लंबित है।
रकम जेल अधिकारियों तक पहुंचाने का आरोप
अदालत ने कहा कि रिश्वत की रकम अलग-अलग बैंक खातों के जरिये मंगाई जाती थी और बाद में नकद निकालकर संबंधित जेल अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी। इस पूरी व्यवस्था में कई सरकारी कर्मचारियों और निजी लोगों की भूमिका सामने आई है।
अदालत ने कहा कि जांच में सामने आए तथ्य बताते हैं कि कैदियों और उनके स्वजन को जेल के अंदर परेशान किए जाने और उन पर दबाव बनाने के बाद भुगतान के लिए मजबूर किया जाता था। रकम पहुंचाने के लिए आरोपितों के अलावा उनके परिचितों और रिश्तेदारों के बैंक खातों का भी इस्तेमाल किया गया।
