
गाजियाबाद: गाजियाबाद के स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा और समस्याओं के समाधान के लिए ‘शिकायत पेटिका’ अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत, ACP कोतवाली नगर ने स्कूलों में लगे कम्प्लेंट बॉक्स से मिली शिकायतों और सुझावों की खुद समीक्षा की. गाजियाबाद पुलिस ने मिशन शक्ति के तहत इस विशेष अभियान को शुरू किया है. इस पहल का मकसद छात्राओं को अपनी समस्याएं और सुझाव बिना किसी हिचकिचाहट के बताने के लिए एक सुरक्षित और गोपनीय ज़रिया देना है. साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, जागरूकता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है.
पुलिस के मुताबिक, इस पहल के तहत जिले के विभिन्न स्कूलों में शिकायत पेटीका रखवाई जा रही हैं. इन पेटिकाओं में बच्चे अपनी समस्याओं के साथ छोटी-छोटी इच्छाएं भी लिख रहे हैं. शिकायत पेटी से निकली पर्चियों में बच्चों को अलग-अलग तरह की परेशानियां सामने आई है. कुछ बच्चों ने स्कूल की सामान्य व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याएं लिखी तो कुछ ने स्कूल बस से संबंधित शिकायत दर्ज कराई. कुछ पर्चियों में बच्चों ने बताया है कि रास्ते से गुजरते समय उन्हें ऐसा महसूस होता है कि जैसे कोई व्यक्ति उन्हें देख रहा है.
इन शिकायतों से यह भी सामने आया है कि हर परेशानी का संबंध किसी बड़ी घटना से नहीं होता. कई बार बच्चे अपने मन का डर, चिंता किसी के सामने खुलकर नहीं बता पाते हैं. ऐसे में शिकायत पेटीका उनके लिए अपनी बात कहने का एक माध्यम बन रही है. शिकायत पेटिका में केवल समस्याएं ही नहीं बच्चों की फरमाइशें भी सामने आई है. किसी ने स्कूल में गेम्स पीरियड बढ़ाने की मांग की है तो किसी ने परिसर में और झूले लगवाने की इच्छा जताई है. यानी बच्चों ने इन पेटिकाओं के जरिए पुलिस को यह भी बताया है कि वह अपने स्कूल को कैसा देखना चाहते हैं.
पुलिस अब बच्चों की शिकायतों को समझने के साथ उनके समस्याओं के समाधान पर भी काम करेगी. जिन बच्चों ने किसी तरह की भी परेशानी का जिक्र किया है. उनकी काउंसलिंग कराने की पहल भी की जाएगी, ताकि उनकी बात समझ कर जरूरी मदद उपलब्ध कराई जा सके.
एसीपी कोतवाली उपासना पांडे के मुताबिक,
”मिशन शक्ति अभियान के तहत गाजियाबाद पुलिस द्वारा जिले के विभिन्न स्कूलों में शिकायत पेटी रखवाई गई है. शिकायत पेटिका के माध्यम से मिले प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लिया गया है. अभी तक कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है. स्कूल के स्टाफ, शिक्षकों से संबंधित कोई शिकायत नहीं मिली है. इस पहल का उद्देश्य बच्चों को अपनी बात रखने का अवसर देना और उनकी समस्याओं को समय रहते समझना है.”
