
गाजियाबाद। आबादी का विस्तार बढ़ने के साथ जंगल और इंसानों के बीच की दूरी कम हो रही है। वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने के मामले सामने आते रहते हैं।
वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने सितंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच 574 वन्यजीवों को सुरक्षित रेस्क्यू कर प्राकृतिक आवास में छोड़ा।
इस अवधि में वन विभाग ने 30 अजगर, 71 कोबरा और 62 वाइपर सांपों का रेस्क्यू किया गया। इसके अलावा 72 मानिटर लिजर्ड को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
वन्यजीवों को रेस्क्यू करने के बाद उन्हें आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। साथ ही एक तेंदुए का रेस्क्यू कर उसके पुनर्वास की कार्रवाई भी की गई।
रेस्क्यू टीमों ने अभियान चलाया
इनके अलावा पक्षियों के संरक्षण में भी विभाग ने अभियान चलाया। एक वर्ष के दौरान 1 उल्लू और 30 मोर का रेस्क्यू किया गया। इस तरह विभिन्न प्रजातियों को सुरक्षित करने के लिए विभाग की रेस्क्यू टीमों ने लगातार अभियान चलाया।
105 गांवों में जन जागरूकता गोष्ठियां आयोजित
विभाग ने न सिर्फ वन्यजीवों और पक्षियों को रेस्क्यू किया बल्कि लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया। वन विभाग ने 95 ग्राम चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों के बीच वन्यजीव संघर्ष के प्रति जागरूकता किया। साथ ही 105 गांवों में जन जागरूकता गोष्ठियां आयोजित की गईं।
इन गोष्ठियों में ग्रामीणों को तेंदुए, सांप व अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी में बरती जाने वाली सावधानियों और वन विभाग को सूचना देने के तरीकों के बारें में जागरूक किया गया।
इसके अलावा विभाग की छह टीमों ने 120 गांवों में 36,70 किलोमीटर पैदल गश्त कर लोगों से जनसंवाद किया। विभाग का उद्देश्य वन्यजीवों के रेस्क्यू के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाकर मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को कम करना है।
वन्य जीव संरक्षण सप्ताह आठ अक्टूबर तक मनाया जा रहा है। एक साल में जिले में 574 वन्य जीव रेस्क्यू किए गए हैं। वन्य जीव संरक्षण को लोगों को जागरूक किया जा रहा है। – सलोनी मलिक, उप प्रभागीय वन अधिकारी
