यमुना अथॉरिटी की पहल: ASCA लैब के लिए 8 कंपनियां रेस में, 15 जुलाई तक बिड

News Desk
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ग्रेटर नोएडा: यमुना सिटी में विकसित हो रहे मेडिकल डिवाइस पार्क में साउथ एशिया की पहली एक्रिडिटेशन स्कीम फॉर कंफरमिटी असेसमेंट (आस्का) लैब बनेगी। इसे बनाने के लिए आठ कंपनियों ने रुचि दिखाई है। यमुना अथॉरिटी के साथ हुई बैठक में इन कंपनियों ने अपने सुझाव भी दिए हैं। इन सुझावों को अथॉरिटी बिड डाक्यूमेंट में शामिल करेगी। इसके बाद कंपनियां 15 जुलाई तक बिड जमा कर सकती हैं।

पिछले दिनों हुई थी प्री बिड मीटिंग

मेडिकल उपकरण बनाने वाले स्टार्टअप और कंपनियों को भविष्य में उन्हें अपने उत्पादों को निर्यात का अनुमोदन कराने के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएस एफडीए) की आस्का लैब नहीं जाना पड़ेगा। इसके लिए अथॉरिटी ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट निकाला था। इसको लेकर पिछले दिनों प्री बिड मीटिंग हुई थी। इसमें बायोजेड इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड, एएलएस टेस्टिंग लैब, बायोसाइंसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एक्यूप्रेक फार्म, क्वालिटेक ग्रुप, सुक्रा फार्म, ए एंड ए लैब और वैगमाइन एंटरप्राइजेज कंपनियां शामिल हुई।

15 जुलाई तक की तारीख तय

कंपनियों ने अपने सुझाव दिए हैं। अथॉरिटी अब इन सुझावों पर विचार करेगी। जो सुझाव बेहतर होंगे, उन्हें बिड डॉक्यूमेंट में शामिल करेगी। इसके बाद कंपनियां अपनी बिड जमा कर सकेंगी। इसके लिए 15 जुलाई तिथि तय की गई है। जरूरत पड़ी तो इसकी तिथि बढ़ाई जाएगी।

यमुना सिटी में साउथ एशिया की पहली एक्रिडिएशन स्कीम फॉर कंफरमिटी असेसमेंट लैब बनेगी। इसको बनाने के लिए आठ कंपनियों ने रुचि दिखाई है। कंपनियों ने अपने सुझाव दिए है। कंपनिया 15 जुलाई तक बिड जमा कर सकती हैं।

शैलेंद्र भाटिया, एसीईओ, यमुना अथॉरिटी

एजेंसी का क्या काम होगा

आस्का लैब को सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर स्थापित किया जाएगा। इस लैब को बनाने के लिए तमाम नियम और शर्तें होती हैं। उनका पालन करना जरूरी होता है। लैब किस मॉडल पर बनेगी। अथॉरिटी केवल जमीन देगी और निर्माण कार्य और संचालन आस्का प्रबंधन करेगा। या जमीन और निर्माण कार्य अथॉरिटी करेगी और संचालन आस्का प्रबंधन करेगा। इसका फाइनेंसियल मॉडल क्या होगा। चयनित एजेंसी को इन सब बिदुओं पर काम करना होगा। इसलिए चयनित एजेंसी की भूमिका बेहद अहम होगी।

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