वजीराबाद हत्याकांड सुलझा, सीसीटीवी और जांच से पुलिस पहुंची आरोपितों तक

News Desk
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नई दिल्ली। पुरानी दुश्मनी में व्यक्ति की चाकू से वारकर हत्या करने वाले तीन बदमाशों को डेढ़ महीने बाद वजीराबाद थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित महाराष्ट्र, पंजाब, जम्मू, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में छिपे हुए थे और लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे।

इनकी पहचान संगम विहार के धीरज, नेहरू विहार के तरुण उर्फ तन्नी और अमृतसर के सन्नी महाजन के रूप में हुई है। तीनों आरोपित तिमारपुर थाने के घोषित बदमाश चंदन सैनी को आटो में बैठाकर यमुना खादर पर ले गए थे और उसकी हत्या कर शव झाड़ियों में फेंक दिया था।

इनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किया गया आटो बरामद कर लिया गया है।

शव पर मिले चोट के निशान

उपायुक्त राजा बांठिया के मुताबिक, 21 मई को वजीराबाद थाने को पीसीआर मिली कि जगतपुर पुश्ता रोड के पास यमुना खादर में एक शव पड़ा है। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव कब्जे में लिया, जिस पर धारदार हथियार के कई चोट के निशान मिले।

मृतक के हाथ पर टैटू बना हुआ था, जो कई चोटों के कारण साफ नहीं दिख रहा था। मृतक की फोटो स्थानीय इलाकों में दिखाई गई और टैटू की मदद से उसकी पहचान चंदन सैनी के रूप में हुई। यह भी पता चला कि वह तिमारपुर थाने का बीसी था और झपटमारी, सेंधमारी और चोरी के पांच मामलों में शामिल रहा था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस ने खंगाले सीसीटीवी फुटेज

जांच के दौरान, घटनास्थल आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गईं। स्थानीय स्तर पर पूछताछ में पता चला कि 20 मई की रात मृतक के घर एक आटो आया था, जिसमें वह बैठकर निकला था। इस बात की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज से भी हुई।

हालांकि, फुटेज में आटो का रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिला। आगे की जांच मृतक के साथी सुरजीत उर्फ बच्ची से भी पूछताछ की गई, जो तिमारपुर थाने का बीसी भी है। उसने बताया कि मृतक चंदन और तरुण के बीच दुश्मनी थी। उसने यह भी बताया कि घटना से दो दिन पहले चंदन ने कुछ अन्य दोस्तों के साथ मिलकर तरुण के भाई सौरभ के साथ झगड़ा किया था।

पुलिस टीम ने तरुण के घर पर छापा मारा, लेकिन घटना के बाद से ही वह फरार था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि तरुण का चचेरा भाई सनी और धीरज भी 18 मई को तरुण के घर आए थे और वे भी घटना के बाद से फरार थे।

पुलिस की एक टीम अमृतसर भेजी गई, लेकिन वह वहां नहीं मिला। स्थानीय पूछताछ से पता चला कि सनी, तरुण और धीरज कुछ दिन पहले अमृतसर पहुंचे थे और एक रात रुकने के बाद वहां से निकल गए।

इसके बाद टीम ने मुंबई, अमृतसर और कटरा (जम्मू) में छापेमारी की लेकिन वह वहां से भी फरार मिले। इसके बाद पांच जून को एसआइ दिनेश को गुप्त सूचना मिली कि आरोपित धीरज को कासिम विहार, लोनी में देखा गया है। सूचना पर टीम ने छापेमारी कर उसे दबोच लिया।उसकी निशानेदही पर उसी दिन सब्जी मंडी मोर्चरी के पास से तरुण और सनी को भी दबोचा लिया गया।

बदला लेने के लिए रची थी साजिश

पूछताछ में तरुण ने बताया कि 18 मई को मृतक और उसके साथियों ने उसके भाई सौरभ को अगवा करने की कोशिश की थी, तरुण ने बदला लेने के लिए उसे खत्म करने की साजिश रची।

तरुण अपने दोनों साथियों के साथ अपने किराए के आटो में मृतक के घर पहुंचा। शराब पीने के बहाने वे मृतक को मिलन विहार के पास यमुना खादर लेकर पहुंचे। उन्होंने चाकू से कई बार वाकर उसकी हत्या की और फरार हो गए।

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