हथनीकुंड से बढ़ा पानी छोड़ा गया, दिल्ली में यमुना के जलस्तर पर नजर

News Desk
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नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश से यमुना में अधिक पानी आने के कारण हरियाणा के हथनी कुंड बैराज से पहले की तुलना में अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। शुक्रवार को सुबह 10 बजे अधिकतम 38379 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।

रात में भी 30 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे दिल्ली में यमुना का जलस्तर में वृद्धि होने की संभावना है। इसे ध्यान में रखकर दिल्ली सरकार ने निगरानी बढ़ा दी है।

शुक्रवार देर शाम दिल्ली में पुराना लोहा पुल के पास जलस्तर 201.90 मीटर था। लेकिन हथनी कुंड से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण रविवार तक जलस्तर में अधिक वृद्धि होने की बात कही जा रही है। इसे ध्यान में रखकर सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग स्थिति पर नजर रख रहा है।

अभी बाढ़ का खतरा नहीं

विभाग के अधिकारियों का भी कहना है कि अभी बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। जलस्तर 204.5 मीटर स्तर पहुंचने और एक लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर चेतावनी जारी की जाती है। उसके बाद यमुना के निचले हिस्से से लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जाता है। 205.33 मीटर खतरे का निशान है।

पिछले माह मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में गठित एपेक्स कमेटी ‘फ्लड कंट्रोल आर्डर-2026’ जारी किया था। इसमें तीन मंत्रियों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। मंत्री प्रवेश वर्मा, आशीष सूद और मनजिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व में उच्च स्तरीय सेक्टर कमेटियों का गठन किया गया है।

प्रत्येक सेक्टर कमेटी में 3-4 जिला मजिस्ट्रेट शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर एनडीआरएफ की टीमें भी तत्काल सहायता के लिए उपलब्ध रहेंगी। 15 जून से केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24×7 आधार पर सक्रिय कर दिया गया है।

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने आधुनिक डिजिटल प्रणाली विकसित किया है। इसके माध्यम से हथिनीकुंड बैराज से छोड़े जाने वाले पानी, पल्ला क्षेत्र में जल प्रवाह और यमुना के जलस्तर की वास्तविक समय आधार पर जानकारी उपलब्ध रहेगी।

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की तैयारी

– यमुना के तटबंधों एवं रेगुलेटरों को मजबूत किया गया है।
– प्रमुख पंप हाउसों का उन्नयन कार्य पूरा हो गया है।
– पानी निकालने को 243 पंप,
– आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए 41 नाव, 31 मोटरबोट इंजन और 12 बोट कैरिज ट्रालियां उपलब्ध।
– यमुना तटबंध और नालों से पानी निकासी की निगरानी के लिए सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, पीडब्ल्यूडी और एमसीडी की संयुक्त निरीक्षण समितियां गठित की गई है। नियमित गश्त।

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