
गाजियाबाद: गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित गौर कैस्केड सोसाइटी के बच्चे इन दिनों पढ़ाई के बाद रामलीला की तैयारियों में भी व्यस्त हो जा रहे हैं. कोई अपने साथी कलाकार को उसका भूला हुआ डायलॉग याद दिलाने में मदद कर रहा है, तो कोई अपने संवाद को बार-बार दोहरा रहा है. रामलीला की पूरी जिम्मेदारी बच्चों के कंधों पर है. बच्चे ही इसमें पात्र बन रहे हैं, डायलॉग बोल रहे हैं और मंच पर रामायण के प्रसंग को जीवंत करने की तैयारी में लगे हुए हैं. लगभग 2 महीने से चल रहे रिहर्सल में उनके लिए रामलीला केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सीखने-समझने और मिलकर काम करने का एक माध्यम बन गई है.
सोसाइटी के वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व में आयोजित होने वाली यह बाल रामलीला एक खास परंपरा बन चुकी है. पिछले 4 वर्षों से यहां दशहरे के अवसर पर बच्चे रामलीला का मंचन करते हैं. समिति के क्लब हाउस में प्रतिदिन होने वाले रिहर्सल का उद्देश्य केवल संवाद याद करना नहीं, बल्कि प्रत्येक दृश्य को इस तरह से तैयार करना है कि दशहरे के दिन दर्शकों के सामने पूरी रामलीला प्रभावी ढंग से प्रस्तुत की जा सके. रिहर्सल में बच्चे कभी किरदार के अंदाज में बोलने की कोशिश करते हैं तो संवादों और भूमिकाओं को लेकर गंभीर दिखाई देते हैं.
रामलीला में रावण की सेना के सैनिक की भूमिका निभा रहे माधव पाल ने बताया कि उन्हें रामलीला के प्रसंग की विस्तृत जानकारी मिल रही है. उन्हें विशेष रूप से यह जानने का अवसर मिला है कि भगवान हनुमान ने रावण की सोने की लंका में आग कैसे लगाई थी. रिहर्सल के दौरान जब किसी घटना का एक्ट किया जाता है तो उसके पीछे की कथा और पात्र की भूमिका पर भी बच्चों का बारीकी से ध्यान जाता है.
वहीं आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली अदिति सिंघल बाल रामलीला में हिरण का किरदार निभा रही हैं. वह बताती हैं कि हर दृश्य को बेहतर बनाने के लिए कई बार रिहर्सल करती हैं. रिहर्सल का यह समय काफी आनंददायक है. एक ही दृश्य को बार-बार दोहराने के बावजूद बच्चों का उत्साह बना रहता है क्योंकि हर कोशिश के साथ प्रस्तुति को बेहतर बनाने का मौका मिलता है. उनके अलावा अंगद की भूमिका निभा रहे अयान सिंह का कहना है कि सभी बच्चे अलग-अलग किरदार निभा रहे हैं लेकिन इस दौरान उन्हें रामलीला के सभी पात्रों के बारे में समझने का मौका मिल रहा है. इस आयोजन में हिस्सा लेकर बहुत कुछ सीखने को मिला है. अलग-अलग भूमिकाओं को समझने से बच्चों को यह भी पता चलता है कि रामायण की कथा केवल मुख्य पात्रों तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें प्रत्येक चरित्र की अपनी भूमिका और महत्व है.
सोसाइटी के विक्रांत बच्चों को बाल रामलीला के मंचन की तैयारी करा रहे हैं. उन्होंने बताया कि सभी के सहयोग से ही बाल रामलीला का आयोजन संभव हो पता है. एसोसिएशन के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया जाता है और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी RWA संभालती है. पिछले 4 वर्षों से सोसाइटी में दशहरे पर बाल रामलीला का मंचन किया जा रहा है. विक्रांत के मुताबिक, इस साल तकरीबन 33 बच्चे रामलीला में हिस्सा ले रहे हैं. जिनकी उम्र लगभग 10 से 13 साल के बीच है. दशहरे के दिन सोसाइटी परिसर में होने वाले मंचन की अवधि 50 मिनट निश्चित है. इसके लिए लगभग 2 महीने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी जाती हैं. इतने कम समय में रामायण के विभिन्न प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत करने के लिए बच्चों को नियमित रूप से रिहर्सल कराया जाता है. बाल रामलीला आयोजित करने के पीछे उनका उद्देश्य बच्चों को भगवान राम के संस्कारों से परिचित कराना है.
