सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती: दवा कंपनियों की अनैतिक गतिविधियों पर प्रभावी शिकायत तंत्र बनाने के निर्देश

Amit
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नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दवा कंपनियों की संदिग्ध और अनैतिक मार्केटिंग प्रथाओं पर कड़ा रुख अपनाने का संकेत देते हुए उपभोक्ताओं के लिए एक सक्षम और आसान शिकायत व्यवस्था तैयार करने को कहा है। कोर्ट का कहना है कि ऐसा सिस्टम होना चाहिए जिसमें पीड़ित उपभोक्ता बिना किसी जटिलता के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें और दोषी कंपनियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें फार्मा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रलोभन देकर दवाओं की बिक्री बढ़ाने की कथित गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने दवाओं की कीमतों से लेकर मार्केटिंग तक कई स्तरों पर नियंत्रण की नीतियाँ लागू की हैं। उन्होंने यूनिफॉर्म कोड फार फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (UCPMP)–2024 का जिक्र किया, जिसमें कंपनियों को डॉक्टरों या उनके परिवारों को उपहार, यात्रा या किसी भी प्रकार का लाभ देने पर प्रतिबंध है।

इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब सरकार एक समान आचार संहिता लागू कर रही है, तो उसमें उपभोक्ताओं के लिए शिकायत दर्ज कराने और गलत कंपनियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने का स्पष्ट ढांचा शामिल क्यों नहीं किया गया।

नटराज ने बताया कि UCPMP के तहत शिकायत और दंड की व्यवस्था का प्रावधान है तथा भविष्य में इसके लिए एक स्वतंत्र ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया जा सकता है। उन्होंने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 का भी उल्लेख किया, जो दवाओं के निर्माण और बिक्री को नियंत्रित करता है।

पीठ ने कहा कि UCPMP की प्रक्रिया इतनी मजबूत होनी चाहिए कि हर उपभोक्ता आसानी से अपनी शिकायत दर्ज कर सके और उसके निपटान तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो। साथ ही, मूल्य निर्धारण पहले से ही अलग तंत्र के तहत नियंत्रित किया जाता है।

याचिकाकर्ता पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने दलील दी कि UCPMP 2024 फिलहाल एक स्वैच्छिक संहिता है, इसलिए इसकी प्रभावशीलता सीमित है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या इसे वैधानिक रूप देने या इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से सुझाव पेश करने को कहा और सरकार से इस पूरे मुद्दे पर स्पष्ट निर्देश लेने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर के लिए तय की गई है।

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