गाजियाबाद। 11 अगस्त को होने वाली सावन शिवरात्रि पर इस बार गाजियाबाद से लाखों कांवड़ियों के गुजरने की संभावना है। इसे देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
छह अगस्त से चरणबद्ध डायवर्जन लागू होगा। करीब चार हजार पुलिसकर्मी, 1500 वालंटियर, 150 बीट, 50 अस्थायी चौकियां, ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे कांवड़ मार्ग की निगरानी होगी। कांवड़ सेल और कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को केवल वाहनों के लिए आरक्षित रखा जाएगा, जबकि कांवड़िए मेरठ रोड और गंगनहर कांवड़ मार्ग से गुजरेंगे। इन तैयारियों और इस बार की रणनीति पर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था एवं यातायात) राजकरन नैय्यर से दैनिक जागरण संवाददाता विनीत कुमार की हुई बातचीत के प्रमुख अंश…
प्रश्न-इस बार कांवड़ यात्रा की तैयारियों में सबसे बड़ा फोकस किन बिंदुओं पर है?
उत्तर-इस बार हमारी पूरी तैयारी तीन बिंदुओं पर केंद्रित है कांवड़ियों की सुरक्षा, निर्बाध यात्रा और आम लोगों के लिए बेहतर यातायात व्यवस्था। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए करीब चार हजार पुलिसकर्मी और डेढ़ वालंटियर तैनात किए जाएंगे।
पूरे कांवड़ मार्ग को 150 बीट में बांटा गया है, यानी लगभग हर 600 मीटर पर पुलिस की मौजूदगी रहेगी। इसके अलावा 50 अस्थायी चौकियां बनाई जा रही हैं, ताकि किसी भी सूचना पर तुरंत कार्रवाई हो सके। हमारा प्रयास है कि पूरी यात्रा के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था न होने पाए।
प्रश्न- यातायात व्यवस्था को लेकर इस बार क्या नई रणनीति बनाई गई है?
उत्तर- छह अगस्त से चरणबद्ध डायवर्जन लागू कर दिया जाएगा, ताकि अंतिम समय में लोगों को परेशानी न हो। इस बार ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ियों का प्रवेश नहीं होगा। इन दोनों मार्गों का उपयोग केवल सामान्य वाहनों के लिए होगा। कांवड़िए मेरठ रोड और गंगनहर कांवड़ मार्ग से ही गुजरेंगे। इससे एक ओर श्रद्धालुओं को सुरक्षित और समर्पित मार्ग मिलेगा, वहीं दूसरे राज्यों और शहरों के बीच आवागमन भी प्रभावित नहीं होगा। ट्रैफिक पुलिस लगातार एडवाइजरी जारी करेगी और जरूरत के अनुसार डायवर्जन में बदलाव भी किए जाएंगे।
प्रश्न-सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक और निगरानी का कितना उपयोग किया जाएगा?
उत्तर-इस बार तकनीक का उपयोग पहले से अधिक किया जाएगा। पूरे कांवड़ मार्ग पर ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी होगी। इसके साथ ही जहां जरूरत होगी, वहां अस्थायी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। हर गतिविधि पर कंट्रोल रूम से नजर रखी जाएगी।
यदि कहीं भी भीड़ बढ़ती है, जाम लगता है या कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो तत्काल संबंधित बीट और चौकी को सूचना देकर कार्रवाई कराई जाएगी। तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस के रेस्पांस का समय कम होगा और सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
प्रश्न- दूसरे राज्यों और जिलों के साथ समन्वय किस तरह रहेगा?
उत्तर- कांवड़ यात्रा कई जिलों से होकर गुजरती है, इसलिए समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से दिल्ली पुलिस के साथ संयुक्त बैठकें की जाएंगी, ताकि सीमा क्षेत्रों पर यातायात और सुरक्षा व्यवस्था एक जैसी रहे। इसके अलावा आसपास के जिलों के अधिकारियों से भी लगातार संपर्क रहेगा। जनपद स्तर पर कांवड़ सेल का गठन किया जा चुका है और कांवड़ कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा। किसी भी सूचना या आपात स्थिति में सभी एजेंसियां मिलकर तुरंत कार्रवाई करेंगी।
प्रश्न-डायवर्जन के कारण आम लोगों को कम परेशानी हो, इसके लिए क्या व्यवस्था रहेगी?
उत्तर-हमारी कोशिश सिर्फ कांवड़ यात्रा को सुरक्षित कराना नहीं, बल्कि आम लोगों की दैनिक जिंदगी भी कम से कम प्रभावित हो, यह सुनिश्चित करना है। इसी उद्देश्य से छह अगस्त से चरणबद्ध डायवर्जन लागू किया जाएगा और समय-समय पर उसकी समीक्षा भी होगी। गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस अपने फेसबुक और एक्स हैंडल पर लगातार ट्रैफिक अपडेट, डायवर्जन और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी साझा करेगी।
इसके अलावा कांवड़ कंट्रोल रूम और ट्रैफिक कंट्रोल रूम भी 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। लोग फोन कर अपने रूट की जानकारी ले सकेंगे। जरूरत पड़ने पर मौके की स्थिति के अनुसार वैकल्पिक मार्ग भी तत्काल खोले या बदले जाएंगे, ताकि लोगों को अनावश्यक जाम और लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

