
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश की सत्ता तक पहुंचने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन पर मजबूत पकड़ बनाना भाजपा के लिए अहम है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम की 126 सीटों पर भाजपा को 2017 के मुकाबले 15 सीटों का नुकसान हुआ था।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा इस नुकसान की भरपाई करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसमें जाट मतदाताओं और किसान वर्ग को अपने साथ जोड़ना पार्टी की प्राथमिकता दिखाई दे रही है।
राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन को भाजपा इस रणनीति की बड़ी ताकत मान रही है। यही वजह है कि गाजियाबाद में आयोजित पदयात्रा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को याद करने के साथ किसानों के मुद्दे पर भी खास जोर दिया।
आंकड़ा घटकर 85 रह गया
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाट मतदाताओं का प्रभाव कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाता है। किसान आंदोलन के बाद इस क्षेत्र में भाजपा के सामने राजनीतिक चुनौती बढ़ी थी। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम की 126 सीटों में से 100 पर जीत हासिल की थी, जबकि 2022 में यह आंकड़ा घटकर 85 रह गया।
रालोद अब भाजपा के साथ एनडीए में
वर्ष 2022 के चुनाव में सपा और रालोद ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। इसका असर भाजपा के प्रदर्शन पर भी दिखाई दिया। इस बार राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं। रालोद अब भाजपा के साथ एनडीए में है। ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि दोनों दलों के साथ आने से जाट मतदाताओं और किसान वर्ग के बीच उसकी पकड़ मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पदयात्रा के दौरान चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने का उल्लेख करते हुए इसे किसानों और उत्तर प्रदेश की भावनाओं का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह किसानों की आवाज उठाते थे, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसान को सरकार के एजेंडे में शामिल किया।
किसान सम्मान निधि, स्वाइल हेल्थ कार्ड और खेती में तकनीक के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। यह संबोधन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान और जाट मतदाताओं तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
पदयात्रा में रालोद के राष्ट्रीय महामंत्री त्रिलोक त्यागी और पार्टी के अन्य नेताओं की मौजूदगी भी गठबंधन की एकजुटता का संदेश दे रही थी।
भाजपा जानती है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किए बिना प्रदेश की सत्ता का रास्ता आसान नहीं होगा। ऐसे में 126 सीटों पर अपनी पुरानी बढ़त हासिल करना पार्टी की बड़ी चुनावी चुनौती है।
