
गाजियाबाद : गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में बिना कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) पजेशन देने पर हाई कोर्ट ने जीडीए की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाए थे। अब अपनी साख बचाने के लिए प्राधिकरण 100 से ज्यादा बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। बिल्डरों पर आरोप है कि इन्होंने नियम-कायदों को ताक पर रखकर सीसी लिए बिना ही खरीदारों को फ्लैट हैंडओवर किए थे। अधिकांश को कारण बताओ नोटिस भेज दिए गए, जबकि कई मामलों में थानों में लिखित तहरीर भी दी गई है।
गौरतलब है कि राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग रिपब्लिक, इंदिरापुरम, वैशाली और कौशांबी के अलावा एनएच-9 के किनारे बनी बड़ी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में तमाम औपचारिकताएं पूरी किए बिना ही आवंटियों को फ्लैट के पजेशन दे दिए गए। ऐसा होना लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ है। ऐसा ही मामला मोहननगर की गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में देखने को मिला था। वहां बिना सीसी ही पजेशन दे दिया गया था। इससे निवासियों को बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। जब मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने प्राधिकरण के ढीले रवैये और बिल्डर की मनमानी पर कड़ा संज्ञान लिया। हाई कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी और निर्देशों के बाद जीडीए में हड़कंप मच गया।
बिल्डर पर केस दर्ज करने का आदेश
भविष्य की अदालती कार्रवाइयों से खुद को बचाने के लिए कागजी प्रक्रिया तेज कर दी है। जीडीए ने नूरनगर स्थित आरकेएस बिल्डकॉन (हेरिटेज टावर-टी) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए है। बिल्डर ने 4 करोड़ रुपये से अधिक का शमन शुल्क नहीं जमा किया और बिना सीसी व शमन मानचित्र स्वीकृत कराए ही अवैध रूप से फ्लैट व दुकानें बेच दी। जीडीए ने नदग्राम थाने में एफआईआर के लिए तहरीर दी है।
प्राइम लोकेशन की सोसायटियां रडार पर
ट्रांस हिंडन, शहर के अलावा लोनी आदि एरिया में कई बड़ी ग्रुप हाउसिंग सोसायटिया प्राधिकरण के रडार पर है। इन इलाकों में दर्जनों ऐसी सोसायटिया पाई गई है, जहा इमारतें का निर्माण पूरा हुए बिना और अग्निशमन या अन्य ढांचागत सुरक्षा जांच के बिना ही खरीदारों को चाबियां सौंप दी गई।
बिना जांच पजेशन देने को गंभीरता से लिया
अदालती फटकार के बाद अधिकारी तेजी से फाइले निपटा रहे है ताकि भविष्य में यदि गुलमोहर ग्रीन्स जैसा कोई दूसरा मामला अदालत में पहुंचे, तो वे यह साबित कर सके कि प्राधिकरण ने अपनी ओर से समय रहते सख्त कार्रवाई बिल्डरों को बख्शा नहीं था।
बिना सीसी लिए जिन बिल्डरो ने फ्लैट और दुकानो को बेचकर कब्जा दे दिया है, उनकी सूची तैयार हो रही है। बिल्डरों पर एफआईआर दर्ज करवाने के लिए संबंधित थाने में तहरीर दी जा रही है।
प्रदीप कुमार सिंह, अपर सचिव, जीडीए
साख बचाने की कवायद
जीडीए के अधिकारियो को समझ आ गया कि अगर अब ढिलाई बरती गई, तो गाज सीधे उन पर गिर सकती है। इसी दबाव के चलते प्राधिकरण ने गाजियाबाद की अन्य सोसायटियो की फाइले खंगालनी शुरू की, तो एक के बाद एक 100 से ज्यादा ऐसे बिल्डर सामने आए जिन्होने यही गड़बड़ी की थी।
