गाजियाबाद। अब प्लॉट नहीं सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर रील्स बेची जा रही हैं। गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में अवैध कॉलोनाइजरों ने सोशल मीडिया को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर 30 सेकंड की आकर्षक रील्स डालकर बिना स्वीकृत कॉलोनियों में प्लॉट बेचे जा रहे हैं। स्क्रीन पर सपनों वाला शहर और जमीन के नाम पर खरीदारों को धोखा दिया जा रहा है।
अवैध कॉलोनाइजरों का नया डिजिटल खेल
इन रील्स में ड्रोन शाट से चौड़ी सड़कें और जल्द रजिस्ट्री का दावा किया जा रहा है। कैप्शन में दिल्ली-एनसीआर के पास सबसे सस्ते प्लॉट और पांच साल में दोगुनी कीमत का झांसा दिया जा रहा है। वॉट्सएप नंबर देकर साइट विजिट के लिए गाड़ी भेजने तक का वादा किया जा रहा है।
जीडीए ने अपने रिकार्ड में ऐसे सभी कॉलोनियों को अवैध दर्ज किया है। इसके पीछे स्थानीय प्रापर्टी डीलर, यूट्यूब क्रिएटर और मार्केटिंग एजेंसियां मिलकर यह खेल चला रही हैं। पांच से 10 हजार रुपये में प्रोफेशनल रील बनवाई जाती है। फिर पेड प्रमोशन से उसे लाखों लोगों तक पहुंचाया जाता है। टारगेट ग्रुप में दिल्ली-एनसीआर में किराये पर रहने वाले, छोटी नौकरी वाले और पहली बार घर खरीदने वाले लोग हैं।
प्रतिमाह जीडीए 15 से 20 अवैध कॉलोनियों पर चलाता है बुलडोजर
प्राधिकरण की ओर से विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाती है, लेकिन कुछ दिन बाद फिर से टूटी सड़क और चारदीवारी को ठीक कर दोबारा बिक्री के लिए प्लॉट तैयार कर दिए जाते हैं। जीडीए के अनुसार प्रतिमाह 15 से 20 अवैध कॉलोनियों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।
नुकसान उठा चुके हैं कई खरीदार
लोनी के रहने वाले राजेश ने दो साल पहले फेसबुक रील देखकर छह लाख में प्लॉट बुक किया था। आज तक न रजिस्ट्री हुई, न कब्जा ही मिला। ऐसे ही मुरादनगर की एक कॉलोनी में 40 से अधिक परिवारों ने पैसे दिए, लेकिन जीडीए ने निर्माण पर रोक लगा दी।
यही हाल दुहाई, मसूरी, डासना, बम्हेटा, आकाश नगर, कल्लू गढ़ी, रईसपुर, मैनापुर, एनडीआरएफ रोड, रजापुर समेत आसपास के इलाकों का है। यहां छुटभैया नेता और प्रोपर्टी डीलर कालोनाइजर बनकर जमकर प्लॉटिंग कर रहे हैं।
खरीदने से पहले ये जांच जरूरी
- जीडीए की स्वीकृति देखें कि कॉलोनी का लेआउट जीडीए से पास है या नहीं, जीडीए की वेबसाइट पर चेक करें।
- खसरा-खतौनी और जमीन का प्रकार जरूर देखें कि जमीन कृषि है या आवासीय। कृषि भूमि पर कॉलोनी नहीं कट सकती।
- एनओसी से सुनिश्चित करें कि जल निगम, विद्युत और प्रदूषण विभाग की अनापत्ति है।
- विकास शुल्क और बंधक मुक्त प्रमाणपत्र से सुनिश्चित करें कि जमीन बैंक में बंधक न हो।
हम सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स को अवैध कॉलोनियों के विज्ञापन हटाने के लिए पत्र लिख रहे हैं। लोगों से अपील है कि लालच में न आएं। पहले जीडीए कार्यालय से वैधता जांचें, फिर पैसा लगाएं। अवैध कॉलोनियों व अवैध निर्माण को लेकर जीडीए का अभियान जारी रहेगा।
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– नन्द किशोर कलाल, उपाध्यक्ष जीडीए

