गाजियाबाद। विकसित और व्यवस्थित शहर बनाने के दावों के बीच गाजियाबाद में अवैध फ्लैट कल्चर तेजी से फैल रहा है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में 20 हजार से अधिक अवैध फ्लैट खड़े हो चुके हैं। इनमें अधिकांश निर्माण बिना नक्शा स्वीकृति, अग्नि सुरक्षा और पार्किंग जैसी अनिवार्य सुविधाओं के किए गए हैं।
मास्टर प्लान के तहत विकसित होने वाले आवासीय क्षेत्र अब अव्यवस्थित बस्तियों का रूप ले रहे हैं। शहरी नियोजन विशेषज्ञों की मानें तो समय रहते इस पर प्रभावी कार्रवाई न होने पर भविष्य में यह शहर के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आएगा।
प्राधिकरण का मकसद मास्टर प्लान के अनुरूप आधुनिक आवासीय क्षेत्र विकसित करना था, जहां चौड़ी सड़कें, पार्क, सीवर, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध हों, लेकिन विभागीय निगरानी की कमी और अवैध निर्माण पर समय रहते अंकुश न लग पाने से निजी बिल्डरों ने संकरी गलियों तक में बहुमंजिला फ्लैट खड़े कर दिए।
इंटरनेट मीडिया पर लुभावने विज्ञापनों के सहारे मध्यमवर्गीय परिवारों को सस्ते आवास का सपना दिखाकर फ्लैट बेचे गए और बाद में बिल्डर इससे अलग हो गए। सबसे अधिक चिंता सुरक्षा मानकों को लेकर है। अधिकांश में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं है।
चार से छह मंजिल तक निर्माण ऐसे रास्तों पर कर दिया गया है, जहां दमकल वाहन तक नहीं पहुंच सकते। आग या भूकंप जैसी आपदा की स्थिति में बड़े पैमाने पर जनहानि की आशंका है। बुनियादी सुविधाओं में सड़क, सीवर लाइन और जल निकासी व्यवस्था न होने से जलभराव आम बात है।
पेयजल, बिजली और कूड़ा निस्तारण की व्यवस्थाएं भी आबादी बढ़ने के अनुपात में विकसित नहीं हो सकीं। इसका सीधा असर आसपास की वैध कॉलोनियों पर भी पड़ रहा है। कार्रवाई का सबसे बड़ा संकट यह है कि इन फ्लैटों में हजारों परिवार अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर रह रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने अवैध निर्माण रोकने और खरीदारों के हितों की रक्षा करने की दोहरी चुनौती है।
12 से 24 लाख में टू बीएचके फ्लैट
ग्रामीण क्षेत्रों की खेतों की जमीन पर शहर के विकसित इलाकों का नाम देकर चार से छह मंजिला अवैध इमारतें बना दी गईं। आकर्षक विज्ञापनों के साथ इन्हें 12 से 24 लाख टू बीएचके फ्लैट 90 प्रतिशत बैंक ऋण तक दिलाने का वादा कर बेचे जा रहे हैं। कम कीमत देख मध्यमवर्गीय इस प्रपंच में जिंदगी भर की कमाई के साथ लोन लेकर फंस रहे हैं।
हादसों ने बढ़ाई चिंता
शहर और आसपास के क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों में आग, भवनों में दरार और संरचनात्मक खामियों की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। आकाश नगर, लोनी, मसूरी (मिसलगढ़ी) और खोड़ा जैसे इलाकों में जर्जर या अवैध निर्माणों के गिरने के मामले सामने आए हैं।
25 से 30 कार्रवाई और 100 से अधिक जारी होते हैं नोटिस
जीडीए की वेबवाइट पर 30 से अधिक पुरानी अवैध कालोनियों की सूची है, लेकिन बड़ी संख्या में आबादी बसने पर यहां ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाती। नई कालोनियां विकसित होने की सूचना पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाती है। जीडीए से मिली जानकारी के अनुसार आठ जोन में प्रतिमाह करीब 25 से 30 ध्वस्तीकरण व सीलिंग कार्रवाई और 100 से अधिक नोटिस जारी किए जाते हैं।
अवैध निर्माण के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जहां भी शिकायत या सूचना मिलती है, वहां सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाती है। लोगों से भी अपील की जाती है कि किसी भी फ्लैट की खरीद से पहले उसका स्वीकृत मानचित्र और वैधानिक दस्तावेज अवश्य जांच लें।
– नन्द किशोर कलाल, उपाध्यक्ष जीडीए

