नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए एमसीडी के टोल के साथ व्यावसायिक वाहनों से प्रवेश पर वसूले जाने वाले पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने इसकी वसूली और इसके हिसाब-किताब में गड़बड़ियों को अपनी रिपोर्ट में रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 से 2024-25 तक ईसीसी के नाम पर 1,624.63 करोड़ रुपये वसूले गए। इसमें से 843.12 करोड़ रुपये अभी तक खर्च ही नहीं किए गए हैं।
ईसीसी राजस्व के रिकॉर्ड गायब होने पर उठे सवाल
इसके साथ ही कैग की रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ है कि टोल के साथ ईसीसी वसूली के 280 दिनों का कोई हिसाब ही नहीं है। इसके दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण इसका रिकार्ड नहीं मिला है।
कैग ने इसके लिए शुल्क क्यों नहीं वसूला गया, इसको लेकर सितंबर 2025 में जांच के बाद जवाब मांगा था, लेकिन फरवरी 2026 तक इसका कोई जवाब नहीं आया। रिपोर्ट के अनुसार, जिन 280 दिनों का रिकार्ड नहीं मिला है, उनमें 6 अप्रैल 2018 से 26 अप्रैल 2018 तक 21 दिन और 18 दिसंबर 2020 से 2 सितंबर 2021 तक 259 दिन शामिल हैं।
ECC फंड के उपयोग और लेखांकन पर CAG की आपत्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक ईसीसी की कुल 1,624.63 करोड़ रुपये की राशि में से महज 781.51 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जबकि इस राशि का उपयोग सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और विशेष रूप से साइकिल चालकों एवं पैदल यात्रियों के लिए सड़कों को बेहतर बनाने में किया जाना था।
कैग ने ईसीसी के लेखांकन की प्रक्रिया को भी दोषपूर्ण करार दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, राशि सीधे सार्वजनिक खाते में जमा की जा रही थी, जबकि इसे पहले दिल्ली सरकार के खाते में राजस्व के रूप में दर्ज कर फिर सार्वजनिक खाते में स्थानांतरित किया जाना चाहिए था।
इसका भी जवाब कैग ने अधिकारियों से मांगा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

