न्याय तक त्वरित पहुंच की पहल, सुप्रीम कोर्ट ने तय की याचिकाओं की चार विशेष श्रेणियां

Amit
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नई दिल्ली: न्याय तक समान और शीघ्र पहुंच को मजबूत करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम पहल की है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व में अदालत ने सामाजिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से जुड़ी याचिकाओं को प्राथमिकता से सूचीबद्ध करने और सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है।

इस नई व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट ने चार विशेष श्रेणियां तय की हैं। इनमें दिव्यांगजन और एसिड अटैक पीड़ितों द्वारा दायर याचिकाएं, 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के मामले, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले व्यक्तियों की याचिकाएं और विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता लेने वाले लोगों के मामले शामिल हैं। अदालत का मानना है कि अब तक ये याचिकाएं बड़ी संख्या में लंबित मामलों के बीच पीछे रह जाती थीं।

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा जारी परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि नई याचिका दाखिल करते समय संबंधित श्रेणी का उल्लेख करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही सक्षम सरकारी प्राधिकरण द्वारा जारी प्रमाणपत्र या दस्तावेज भी संलग्न करने होंगे। आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट में सप्ताह में दो दिन 16 पीठों के समक्ष सैकड़ों नए मामलों की सुनवाई होती है, ऐसे में यह व्यवस्था कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों को तेजी से आगे बढ़ाने में सहायक होगी।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न्यायपालिका की संवेदनशीलता और समावेशी सोच को दर्शाता है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2025 में रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए 75 हजार से अधिक मामलों का निपटारा कर न्यायिक इतिहास में एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया है।

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