भारत के शीत मरुस्थल को यूनेस्को की वैश्विक मान्यता, लाहौल-स्पीति को मिला गौरव

Amit
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नई दिल्ली- भारत को जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। यूनेस्को ने हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में स्थित “शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिजर्व” को अपने विश्व बायोस्फीयर रिजर्व नेटवर्क में शामिल कर लिया है। यह फैसला पेरिस में आयोजित यूनेस्को की मानव एवं बायोस्फीयर समन्वय परिषद (MAB) के 37वें सत्र के दौरान लिया गया।

करीब 7,770 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अनोखे क्षेत्र को अब वैश्विक संरक्षण सूची में स्थान मिला है। यह इलाका बर्फीले पठारों, ग्लेशियरों से बनी घाटियों, अल्पाइन झीलों और उच्च पर्वतीय रेगिस्तानों के लिए जाना जाता है। यूनेस्को के अनुसार, यह नेटवर्क में शामिल सबसे ठंडे और शुष्क पारिस्थितिकी तंत्रों में गिना जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मान्यता पर प्रसन्नता जताते हुए देशवासियों को बधाई दी है। साथ ही, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे भारत की पारिस्थितिकी और परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाला कदम बताया।

यूनेस्को के मुताबिक, इस साल 20 देशों के 26 नए बायोस्फीयर रिजर्व नेटवर्क में जोड़े गए हैं, जिससे अब यह संख्या 142 देशों में कुल 785 तक पहुंच गई है।

बिहार को मिला पर्यावरण संरक्षण का नया दर्जा, दो और रामसर साइट घोषित

बिहार की धरती से एक और पर्यावरणीय सफलता की खबर आई है। राज्य के बक्सर जिले में स्थित गोकुल जलाशय और पश्चिम चंपारण की उदयपुर झील को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि (रामसर साइट) घोषित किया गया है। इसके साथ ही बिहार में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है, जबकि पूरे देश में अब 93 रामसर साइट्स हैं।

इन सभी स्थलों का कुल क्षेत्रफल लगभग 13.6 लाख हेक्टेयर है, जो देश की जैव विविधता और जल संसाधनों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा कि यह भारत की सतत विकास और जलवायु प्रतिबद्धताओं की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि पर बिहारवासियों को बधाई दी और कहा कि यह दिखाता है कि किस तरह आम लोग पर्यावरण संरक्षण में नेतृत्व निभा रहे हैं।

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