नई दिल्ली: आज देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. इसी क्रम में राजधानी दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस अत्यंत हर्षोल्लास और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया. इस अवसर पर उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने सिविल लाइंस स्थित लोक निवास में राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इस गरिमामयी समारोह में स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिजनों के साथ-साथ रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के प्रतिनिधि, युवा प्रतीक, छात्र और शहर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. इस दौरान एक औपचारिक पुलिस टुकड़ी ने राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी.
‘शक्ति की सप्तधारा’ को आगे बढ़ाने का आह्वान
स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन करते हुए उपराज्यपाल ने आधुनिक भारत की नींव रखने वाले दूरदर्शी राष्ट्र-निर्माताओं को भी याद किया. लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए स्वतंत्रता दिवस के संबोधन का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘शक्ति की सप्तधारा’ के दृष्टिकोण को रेखांकित किया.
एलजी ने बताया कि मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, टैक्नोलॉजी एंड इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन एंड ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की सॉफ्ट पावर ये सात प्रमुख धाराएं आने वाले वर्षों में देश की विकास यात्रा को गति देंगी. उन्होंने कहा कि ये सभी धाराएं दिल्ली के विकास के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक हैं. इस दौरान उन्होंने राजधानी के नागरिकों से वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाने की अपील की.
‘विकसित दिल्ली’ और जनसेवा को बताया पवित्र दायित्व
अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली के सामने मुख्य लक्ष्य ‘विकसित दिल्ली’ का निर्माण करना है, जो उत्कृष्टता, सुरक्षा और नागरिक गौरव का राष्ट्रीय मॉडल बने. पिछले 50 वर्षों से इस शहर से जुड़े रहने और इसे अपनी कर्मभूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली की सेवा उनके लिए केवल प्रशासनिक कर्तव्य नहीं बल्कि एक पवित्र जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि दिल्ली की हर गली और हर मोहल्ला अपनी एक अनूठी कहानी कहता है, और प्रशासन का सामूहिक दायित्व है कि राजधानी की इस असीम क्षमता को हर नागरिक की सुविधा, गरिमा और कल्याण में बदला जाए.
सार्वजनिक शासन और समन्वय पर जोर
उपराज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली में सार्वजनिक शासन की व्यवस्था प्रधानमंत्री मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र पर आधारित होनी चाहिए. उन्होंने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, स्थानीय निकायों, पड़ोसी राज्यों और नागरिकों के बीच बेहतरीन तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि जटिल चुनौतियों को स्थायी अवसरों में बदला जा सके.
राजधानी की प्राथमिकताओं को गिनाते हुए एलजी ने यमुना की सफाई, वायु प्रदूषण से मुकाबला, सभी के लिए आवास, किफायती स्वास्थ्य सेवाएं, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन तथा दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत के पुनरुद्धार को मुख्य एजेंडा बताया.
युवाओं से की अपील, नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों पर दिया बल
युवाओं को दिल्ली के भविष्य का असली चालक बताते हुए एलजी ने कहा कि उनकी ऊर्जा और रचनात्मक सोच ही आधुनिक दिल्ली की वास्तविक ताकत है. उन्होंने नागरिकों से अपने आसपास के इलाकों को साफ रखने, सार्वजनिक स्थानों की रक्षा करने और अपने मौलिक कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि सरकार सुंदर सार्वजनिक स्थान तो बना सकती है, लेकिन केवल नागरिक ही उन्हें संरक्षित रख सकते हैं. अंत में उन्होंने सभी से एक ऐसी राजधानी के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया जो विरासत और आधुनिकता का अनूठा संगम हो और जहां हर नागरिक खुद को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस करे.

