NEET-UG पेपर लीक में NTA के 3 विशेषज्ञ घेरे में, 85% तक सवालों के मिलान का दावा

News Desk
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नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई के आरोपपत्र ने परीक्षा का प्रश्नपत्र तैयार करने वाली गोपनीय प्रक्रिया में हुई सुरक्षा चूकों को उजागर किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञ ही पेपर लीक के प्राथमिक स्रोत बने।

रसायन विज्ञान के प्रो. पीवी कुलकर्णी, वनस्पति विज्ञान-प्राणि विज्ञान (जूलाजी) की प्रो. मनीषा गुरुनाथ मांधरे और भौतिकी की प्रो. मनीषा संजय हवलदार पर आरोप है कि उन्होंने प्रश्नपत्र तैयार करने, अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन के दौरान हासिल गोपनीय सामग्री को बाहर निकाला। सीबीआइ का आरोप है कि तीनों विशेषज्ञ काम खत्म होने के बाद पुणे लौटकर अभ्यर्थियों को विशेष कोचिंग देते थे, जबकि एनटीए के नियमों के तहत विशेषज्ञों को ऐसी कोचिंग देने की अनुमति नहीं थी।

सीबीआइ के अनुसार, प्रश्नपत्र की सेटिंग, अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन का काम एनटीए के ओखला स्थित भवन में सुरक्षित वातावरण में कराया गया था। इसके बावजूद विशेषज्ञों के प्रवेश और निकास के समय तलाशी या शारीरिक तलाशी (फ्रिस्किंग) की व्यवस्था नहीं थी। एजेंसी ने यह भी पाया कि विशेषज्ञों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के लिए एनटीए कार्यालय में समर्पित लाइव सीसीटीवी मानिटरिंग कंट्रोल रूम नहीं था।

सीबीआइ ने आरोपपत्र में ये भी कहा कि परीक्षा धांधली और पेपर लीक मामले की साजिश के लिए आरोपितों ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 नाम से एक वाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। पुणे स्थित आरोपितों ने जीव विज्ञान की विशेष कक्षाओं और परीक्षा के बाद के मूल्यांकन पर चर्चा के लिए यह ग्रुप बनाया था।

चार सेटों में मिला बड़ा मिलान 

सीबीआइ ने अभ्यर्थियों और बिचौलियों से बरामद सामग्री को दिल्ली विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ समिति से जांच कराया। समिति के अनुसार, लीक सामग्री का बड़ा हिस्सा नीट-यूजी 2026 के कैलाश, शिवालिक, सेट-दो और सेट-तीन से मेल खाता था। जांच एजेंसी के मुताबिक, जिन सेटों तक संबंधित विशेषज्ञों की पहुंच थी, उनमें प्रश्नों का मिलान 85 प्रतिशत तक पाया गया, जबकि जिन सेटों तक उनकी पहुंच नहीं थी, उनमें मिलान सबसे कम था।

सीबीआइ ने तीनों विशेषज्ञों के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(5), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की है। आरोप साबित होने पर संबंधित प्रविधानों में उम्रकैद तक की सजा और लोक परीक्षा कानून के तहत कम से कम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रविधान है। हालांकि, आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी हैं।

रफ वर्क के कागज बने लीक का जरिया 

चार्जशीट के अनुसार, गोपनीय सेक्शन में विशेषज्ञों को रफ वर्क के लिए सादे कागज उपलब्ध कराए जाते थे। सीबीआइ का आरोप है कि केमिस्ट्री विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी ने इसी सुविधा का फायदा उठाया। उन्होंने केमिस्ट्री के 135 प्रश्नों और उनके उत्तर विकल्पों को छोटे-छोटे चिट पर संक्षिप्त रूप में लिख लिया और उन्हें छिपाकर बाहर ले गए।

आरोप है कि कुलकर्णी आसान प्रश्नों को याद भी कर लेते थे और दिन का काम पूरा होने के बाद होटल लौटकर उन्हें दोबारा लिखते थे। वह तीन सेटों के बैक-ट्रांसलेशन के काम से भी जुड़े थे। सीबीआइ के अनुसार, बाद में बरामद लीक सामग्री में केमिस्ट्री के प्रश्नों का सबसे अधिक मिलान उन्हीं सेटों से मिला, जिन तक कुलकर्णी की पहुंच थी।

मंधारे ने एनसीईआरटी से जोड़े सवाल

मनीषा गुरुनाथ मांधरे वनस्पति विज्ञान और प्राणि विज्ञान (जूलाजी) के लिए अंग्रेजी से मराठी अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन से जुड़ी थीं। सीबीआइ के मुताबिक, वह दिन का काम खत्म करने के बाद होटल लौटती थीं और एनसीईआरटी की किताबों में संबंधित पैराग्राफ को चिन्हित करती थीं।

जांच एजेंसी का कहना है कि लंबे अनुभव के कारण वह प्रश्नों को संबंधित एनसीईआरटी की सामग्री से आसानी से जोड़ सकती थीं। आरोप है कि इसी प्रक्रिया से उन्होंने परीक्षा के लिए तैयार किए जा रहे प्रश्नों की सामग्री को दोबारा तैयार करने में मदद की।

68 फिजिक्स प्रश्नों का मामला 

फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार पर आरोप है कि वह भी रोजाना का काम खत्म होने के बाद प्रश्नों को संक्षिप्त रूप में नोट करती थीं। सीबीआइ के अनुसार, उन्होंने बाद में 16 पन्नों में 68 भौतिकी के प्रश्न एक अभ्यर्थी की मां को उपलब्ध कराए।जांच एजेंसी ने जब्त सामग्री की फोरेंसिक जांच कराई। सरकारी प्रश्नित दस्तावेज परीक्षक की रिपोर्ट में 68 भौतिकी प्रश्नों की लिखावट को हवलदार और सह-आरोपित तेजस शाह से जोड़े जाने की बात कही गई है।

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