फर्जी बीमा एजेंट बनकर लोगों को ठगने वाला गिरोह पकड़ा, 10 लाख की ठगी का खुलासा

News Desk
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नई दिल्ली/नोएडा: साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बीमा पॉलिसी में अधिक मुनाफा दिलाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले दो साइबर जालसाजों को मंगलवार को गिरफ्तार किया. आरोपी खुद को नामी बीमा कंपनी का एजेंट बताकर लोगों को पॉलिसी, बोनस और अधिक रिटर्न का लालच देते थे. पुलिस ने उनके कब्जे से एक लैपटॉप, चार स्मार्टफोन और चार कीपैड मोबाइल फोन बरामद किए हैं. जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी अब तक करीब 10 लाख रुपये की ठगी कर चुके हैं. इनके इस्तेमाल किए गए बैंक खातों के खिलाफ तमिलनाडु, महाराष्ट्र और ओडिशा में सात शिकायतें दर्ज हैं.

डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल ने बताया कि 20 जुलाई को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली के शाहीन बाग निवासी 34 वर्षीय अमिरुद्दीन और 32 वर्षीय मुशीर अंजुम को नोएडा से गिरफ्तार किया गया. दोनों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में संबंधित धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे खुद को प्रतिष्ठित बीमा कंपनी का एजेंट बताकर लोगों से संपर्क करते थे. इसके बाद पॉलिसी पर अधिक लाभ, बोनस या मैच्योरिटी राशि मिलने का भरोसा देकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में रुपये जमा करा लेते थे. रकम मिलने के बाद वे पीड़ितों से संपर्क तोड़ देते थे. ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की सिम बाद में तोड़कर फेंक दी जाती थीं, ताकि उनकी पहचान न हो सके.

ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों में की जाती थी जमा

जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम अलग-अलग म्यूल बैंक खातों में मंगाई जाती थी. इन खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर सात शिकायतें दर्ज हैं. इनमें तमिलनाडु की दो, महाराष्ट्र की एक और ओडिशा की चार शिकायतें शामिल हैं. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा ठगी की कुल रकम कितनी है.

डीसीपी साइबर ने लोगों से अपील की है कि बीमा पॉलिसी, बोनस या मैच्योरिटी से जुड़े किसी भी फोन कॉल या संदेश पर बिना सत्यापन भरोसा न करें. किसी अज्ञात व्यक्ति के बताए बैंक खाते में रुपये जमा न करें और ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें. यदि कोई साइबर ठगी होती है तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं.

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