
नई दिल्ली। सत्य निकेतन हादसे के बाद हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामले की चर्चा हुई, लेकिन हादसे के एक माह बीत जाने के बाद भी एमसीडी सिर्फ 774 संपत्तियों को ही ध्वस्त कर पाई है। कार्रवाई की मौजूदा गति को देखें तो इस वर्ष अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए लंबित 80 हजार शिकायतों पर कार्रवाई पूरी करने में एमसीडी को करीब नौ साल से अधिक समय लग सकता है।
6616 संपत्ति को ध्वस्त किया गया
अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर कार्रवाई के लिए गठित स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के आंकड़ों को देखें तो उसके पास दो लाख 37 हजार 559 शिकायतें आई। इसमें से 154750 शिकायत कोई कार्रवाई योग्य नहीं मिली। शेष 82 हजार के करीब शिकायतें हैं जिन पर कार्रवाई होनी है लेकिन, 735 पर कोर्ट से कार्रवाई की रोक है या मामला लंबित है, जबकि 6616 संपत्ति को ध्वस्त किया जा चुका है। 3332 संपत्ति सील पड़ी है।
80 हजार संपत्ति को गिराने में लगेंगे करीब 103 महीने
वहीं, सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी की कार्रवाई का आंकड़ा बताता है कि एक माह में औसतन 774 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई। इस गति से 80 हजार संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई पूरी करने में करीब 103 महीने लगेंगे। यानी लगभग 8.6 वर्ष, बशर्ते हर माह कार्रवाई की यही गति बनी रहे और नई शिकायतें इसमें शामिल न हों।
लोग चार मंजिल से ज्यादा का निर्माण कर रहे
हालांकि, सत्य निकेतन हादसे और एमसीडी की कार्रवाई के बावजूद दिल्ली में अवैध निर्माण तेजी से जारी है। जितने अवैध निर्माण एमसीडी ने गिराये नहीं है उससे ज्यादा अवैध निर्माण दिल्ली में हो रहे हैं। खास तौर पर अनधिकृत काॅलोनियों में लगातार निर्माण जारी है। लोग चार मंजिल से ज्यादा का निर्माण कर रहे हैं।
निगम की कार्रवाई की गति पर उठ रहे सवाल
यह हाल तब है कि जबकि सत्य निकेतन में छह सितंबर को इमारत गिरने के बाद एमसीडी ने अवैध और खतरनाक निर्माण के खिलाफ अभियान तेज करने का दावा किया था। इसके बावजूद एक माह में कार्रवाई का आंकड़ा लंबित शिकायतों की तुलना में काफी कम है। यही वजह है कि निगम की कार्रवाई की गति पर सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारियों से सेटिंग
एमसीडी की कार्रवाई को लेकर यह भी आरोप लग रहे हैं कि निगम सभी शिकायतों पर समान रूप से कार्रवाई नहीं कर रहा है। एमसीडी के निर्माण समिति के चेयरमैन रहे जगदीश ममगांई कहते हैं कि अकसर इमारतें गिरने के बाद तीन चार दिन तो तेज गति से कार्रवाई चलती है।
इसके बाद वहीं, हो जाता है जहां पर एमसीडी के अधिकारियों की सेटिंग नहीं होती उन संपत्तियों को गिरा दिया जाता है और उसी को ध्वस्तिकरण की कार्रवाई में दिखा दिया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे विपरित होती है।
