
एनिमल क्लाइमेट एंड हेल्थ सेव फाउंडेशन इंडिया ने पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज क्षेत्र में कई व्यस्त और प्रमुख स्थानों पर बड़े और साफ शब्दों में लिखे बिलबोर्ड लगाए हैं, जिन पर लिखा है: “दूध पीना मांसाहार है।” यह साहसिक संदेश दूध को लेकर लोगों के मन में बैठी गलतफहमियों को साफ करता है। डेयरी उद्योग में पशुओं पर हो रहे अत्याचार और शोषण की सच्चाई सामने लाना इसका मकसद है।
फाउंडेशन की निदेशक अपराजिता आशीष ने कहा, “दूध का सेवन शाकाहार नहीं है, क्योंकि दूध उत्पादन के लिए पशुओं को जीवन भर तकलीफ़ और अत्याचार सहना पड़ता है।”
इस अभियान का उद्देश्य है कि लोग पशुओं, पर्यावरण और अपने स्वास्थ्य के लिए जागरूक हों और संवेदनशील बनें। वीगन जीवनशैली ऐसी जीवनशैली है जिसमें किसी भी तरह से पशुओं का शोषण या क्रूरता स्वीकार नहीं की जाती, चाहे वह खाना हो, कपड़ा हो या मनोरंजन। पशु अधिकारों की वकालत करने वाले यह मानते हैं कि पशुओं को भी इंसानों की तरह दर्द, डर और तकलीफ़ से आज़ादी मिलनी चाहिए। संस्था सभी से अपील करती है कि वे पौधों से बने उत्पाद चुनकर पशुओं की तकलीफ़ कम करने, पर्यावरण की रक्षा करने और बेहतर सेहत पाने की ओर कदम बढ़ाएं।
एनिमल क्लाइमेट एंड हेल्थ सेव फाउंडेशन इंडिया पशु अधिकारों और पूरी तरह वीगन जीवनशैली के लिए काम करता है।
