जेवर। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन बढ़ने के साथ बर्ड स्ट्राइक का खतरा भी चिंता का विषय बन गया है।
एयरपोर्ट की बाहरी सीमा से महज 500 मीटर दूर किशोरपुर गांव के समीप यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में कार्गो टर्मिनल को जाने वाली रोड के किनारे खुले में कूड़े के ढेर लगे हैं, जबकि नियम है कि 10 किमी के दायरे में कूड़ा का ढेर नहीं होने चाहिए।
कूड़े में खाद्य अवशेष और जैविक कचरा होने से पक्षियों के आकर्षित होने की आशंका है। नोएडा एयरपोर्ट के रनवे के नजदीक इस तरह कूड़ा पड़ा होना विमान सुरक्षा के लिहाज से सवाल खड़े करता है।
सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से महज 500 मीटर की दूरी पर कूड़े के ढेर एयरपोर्ट से टेकआफ और लैंडिंग करने वाले विमानों और उनमें सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है। उड़ान भरने और उतरने के दौरान पक्षियों के विमान से टकराने पर इंजन, विंडस्क्रीन समेत अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे विमान और उसमें सवार यात्री दोनों की सुरक्षा के गंभीर खतरा माना जाता है।
वहीं, ऐसे में एयरपोर्ट परिसर के साथ आसपास के क्षेत्र में भी पक्षियों को आकर्षित करने वाले स्रोतों पर नियंत्रण जरूरी है। एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से वन्यजीव नियंत्रण के उपाय किए जाने के बावजूद बाहरी क्षेत्र में कूड़े का जमावड़ा चिंता का विषय है।
क्या है नियम
वायुयान नियमावली, 1937 के नियम 91 के अनुसार, एयरपोर्ट के एयरोड्रोम रेफरेंस प्वाइंट से 10 किलोमीटर के दायरे में कूड़ा-कचरा, गंदगी, मांस, पशु अवशेष या अन्य सामग्री डालना प्रतिबंधित है, जो गिद्धों या अन्य पक्षियों एवं जानवरों को आकर्षित करती हो।
भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 की धारा 10(2)(जेडबी) में एयरोड्रोम के 10 किलोमीटर के दायरे में पशुओं के वध-चर्म उतारने और कूड़ा, गंदगी और प्रदूषि व दुर्गंधयुक्त पदार्थ जमा करने पर रोक और उल्लंघन पर धारा 25(2) में तीन वर्ष तक की जेल या एक करोड़ रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों का प्रविधान है।
हाल की तीन घटनाओं ने दिखाई खतरे की गंभीरता
बर्ड स्ट्राइक की हाल की घटनाएं भी विमान सुरक्षा से जुड़े इस खतरे की गंभीरता को दिखाती हैं। एक सितंबर को पुणे एयरपोर्ट पर संदिग्ध बर्ड हिट के बाद एयर इंडिया एक्सप्रेस की पुणे-चंडीगढ़ उड़ान रद करनी पड़ी। तकनीकी जांच के दौरान समस्या सामने आने के बाद यात्रियों को करीब तीन घंटे तक विमान में इंतजार करना पड़ा।
वहीं, दूसरी घटना 24 अगस्त को पटना एयरपोर्ट पर दिल्ली से पटना जा रही एयर इंडिया की उड़ान लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। विमान में 164 यात्री सवार थे। पायलट की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया था। इससे पहले 17 जून को रायपुर एयरपोर्ट पर दिल्ली से पहुंची एयर इंडिया की उड़ान लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई थी।
यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (यापल) की तरफ से जानकारी देते हुए बताया गया कि एयरक्राफ्ट आपरेशन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। एयरपोर्ट पर वाइल्डलाइफ हेजार्ड मैनेजमेंट प्लान (डब्ल्यूएचएमपी) लागू है और वन्यजीवों से जुड़े जोखिम को कम करने के लिए एक्टिव व पैसिव उपाय किए जा रहे हैं।
सरकारी गाइडलाइंस के तहत एयरोड्रोम एनवायरनमेंट मैनेजमेंट कमेटी (एईएमसी) भी गठित है। आसपास के कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए जिला प्रशासन के साथ समन्वय किया जा रहा है।
