गाजियाबाद। गाजियाबाद में काम कर रही 1.14 लाख सूक्ष्म और लघु औद्योगिक इकाइयों (एमएसई) के टैक्स में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
नए प्रस्तावित नियमों के तहत इन इकाइयों को संपत्ति कर के आकलन के लिए अब औद्योगिक श्रेणी के बजाय आवासीय भवनों की श्रेणी में रखा जाएगा। इससे जिले में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ निवेश भी बढ़ेगा।
1.14 लाख एमएसई इकाइयों पर पड़ेगा असर
प्रदेश नगर निगम संपत्ति कर पांचवां संशोधन नियमावली-2026 का मसौदा जारी कर दिया है। नगर विकास विभाग द्वारा तैयार इस मसौदे का सीधा असर जिले की करीब 1.14 लाख एमएसई इकाइयों पर पड़ेगा।
इस नए नियम से इन छोटी इकाइयों पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम हो जाएगा। अब तक इनसे व्यावसायिक दरों पर टैक्स वसूला जाता रहा है। हालांकि, मध्यम औद्योगिक इकाइयों और वृहद उद्योगों को इस इस प्रस्ताव का लाभ नहीं मिलेगा। उन्हें पहले की तरह ही आवासीय भवनों की तुलना में तीन गुना संपत्ति कर का भुगतान करना होगा।
सरकार ने मसौदे पर आम जनता, उद्योग संघों और अन्य संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इन आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। जिसके बाद यह नई व्यवस्था नगर निगम क्षेत्रों में लागू होगी। गाजियाबाद से अभी तक कोई आपत्ति करने वाला व्यक्ति सामने नहीं आया है।
नगर निगम को मिलेगी कम टैक्स
इस प्रस्ताव से नगर निगम को टैक्स कम मिलेगा लेकिन प्रस्तावित संशोधन के अनुसार इन इकाइयों की लागत घटेगी। जिले में निवेश के साथ रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
नगर निगम के वरिष्ठ टैक्स प्रभारी जंग बहादुर यादव ने बताया कि संशोधन प्रस्ताव लागू होने से सूक्ष्म और लघु इकाइयों के संचालकों को फायदा होने के साथ निवेश में के अवसर बढ़ेंगे।
इस पर 30 दिन में आम लोगों, उद्योगों व अन्य पक्षों से आपत्ति मांगी गई थी। निगम की ओर से कोई आपत्ति नहीं है। निगम तो लोगों को टैक्स में छूट देने के पक्ष में है।
इन उद्योगों को मिलेगी गति
जिले का औद्योगिक आधार मुख्य रूप से इंजीनियरिंग और मशीनरी उत्पादों पर टिका है। यहां मशीनों के पुर्जे, औद्योगिक उपकरण, धातु उत्पाद, विद्युत उपकरण, मोटर और दूसरे मशीनरी सामान बनाए जाते हैं। इसके अलावा तैयार कपड़े, फर्नीचर, कागज और कागज से जुड़े उत्पाद, प्लास्टिक व रबर उत्पाद, रसायन, खनिज आधारित सामान और वाहन संबंधी पुर्जे बनाने वाली इकाइयां भी हैं।
जिले में 28 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र हैं। जहां सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी की इकाइयां संचालित होती हैं। प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में साहिबाबाद, कविनगर, बुलंदशहर रोड, लोनी और मेरठ रोड क्षेत्र शामिल हैं। प्रस्ताव के लागू होने से इन उद्योगों को गति मिलेगी।
आंकड़े के अनुसार, करीब 1.14 लाख पंजीकृत एमएसएमई उद्योग हैं। इन उद्योगों से करीब साढ़े आठ लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

