
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने मोरी गेट स्थित खोया मंडी में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 7000 किलो सड़ा-गला और दुर्गंधयुक्त खोया जब्त कर नष्ट कराया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वयं मौके पर पहुंचकर कार्रवाई का निरीक्षण किया। त्यौहारों के मौके पर भी दिल्ली में मिलावटखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। नकली खोया, पनीर और देसी घी की बिक्री लोगों की सेहत के लिए भारी खतरा बनी हुई है।
जहर घोलने वालों के लिए कोई जगह नहीं
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने चेतावनी दी कि त्योहारों की खुशियों में जहर घोलने वालों के लिए दिल्ली में कोई जगह नहीं है। मिलावटखोरों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को अभियान लगातार जारी रखने और नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री को बाजार तक पहुंचने से रोकने के निर्देश भी दिए।
44 में से 35 नमूने फेल
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने अभियान के दौरान मोरी गेट खोया मंडी से 44 निगरानी नमूने लिए। इनकी मौके पर खाद्य सुरक्षा जांच वाहन से प्रारंभिक जांच की गई, जिसमें 35 नमूने फेल पाए गए। दो अन्य नमूने विस्तृत जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। प्रारंभिक जांच में खोये में दूध पाउडर, वनस्पति और बाइंडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले पदार्थ मिले हैं।
अब तक 10660 किलो खोया नष्ट
मोरी गेट खोया मंडी में विभाग का यह चौथा अभियान था। इससे पहले चार सितंबर को 2830 किलो, आठ सितंबर को 610 किलो और 23 अक्टूबर को 520 किलो खोया नष्ट कराया गया था। मंगलवार की कार्रवाई के बाद अब तक कुल 10660 किलो खोया नष्ट किया जा चुका है।
घी के 59 नमूनों में 23 में मिलीं खामियां
खोये के साथ देसी घी की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में घी के 59 नमूनों में 19 मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाए गए, जबकि चार नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों से कम मिले।
इसके अलावा 29 अक्टूबर को भोगल, नजफगढ़ और शिव विहार में छापेमारी के दौरान 948.9 लीटर घी जब्त किया गया। इस कार्रवाई में 15 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
दो महीने में 85 नमूनों में मिलीं खामियां
खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले दो महीने में 30 अभियान चलाकर 290 खाद्य नमूनों की जांच की। इनमें 85 नमूने असुरक्षित या निर्धारित गुणवत्ता मानकों से कम पाए गए। इस दौरान 4000 किलो से अधिक खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई। यह आंकड़ा बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।
