
नई दिल्ली। ओखला फेज-1 में सिलिंडर विस्फोट में घायल पांच मरीजों को एम्स के जेपीएन एपेक्स ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। इनमें चार मरीजों उमेश, अरविंद, मनोज और पंकज का उपचार चल रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार 35 वर्षीय मोहित सिंह की उपचार के दौरान मौत हो गई। मोहित को मूल रूप से गांव गढ़िया जगन्नाथ, विकासखंड अलीगंज, जिला एटा, उत्तर प्रदेश का निवासी बताया गया है। वह अभी 20 दिन पहले टाइफाइड से पीड़ित अपने पिता कर्मवीर सिंह को उपचार के लिए दिल्ली लेकर आए थे।
कड़े हैं नियम, पर सुनिश्चित नहीं अनुपालन
व्यावसायिक आक्सीजन सिलिंडरों के निर्माण, भराव, भंडारण और परिवहन को पीएएसओ (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी आर्गनाइजेशन) और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) के कड़े नियमों के तहत रेगुलेट किया जाता है। इसके लिए गैस सिलिंडर नियम, 2016 लागू होते हैं।
भारतीय मानक के अनुसार सिलिंडर की बाडी काली और ऊपरी हिस्सा सफेद होना अनिवार्य है। सिलिंडर पर अंग्रेजी या हिंदी में ”आक्सीजन” और गैस का प्रकार एवं खतरा संकेतक स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए। हालांकि ओखला फेज-एक जिन सिलिंडरों को उतारते समय हादसा हुआ, उनमें इन मानकों का पूरा पालन नहीं हो रहा था।
हर पांच वर्ष में हो परीक्षण व हाइड्रो टेस्टिंग
– सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर पांच वर्ष में एक बार सिलिंडरों की हाइड्रो-स्टेटिक या हाइड्रो-स्ट्रैच टेस्टिंग कराना अनिवार्य है।
-टेस्ट पास करने के बाद सिलिंडरों के ऊपरी हिस्से पर टेस्टिंग की तारीख और परीक्षण केंद्र का कोड पंच किया जाता है।
-एक्सपायरी या बिना टेस्ट वाले सिलिंडरों में गैस भरना अवैध है।
परिवहन के लिए हैं ये नियम:
-परिवहन के दौरान सिलिंडरों को हमेशा सीधा रखा जाना चाहिए और उन्हें चेन या विशेष सांचों से बांधना अनिवार्य है।
-यात्रा के दौरान वाल्व को नुकसान से बचाने के लिए सुरक्षात्मक कैप हमेशा टाइट रखें।
भंडारण और सुरक्षा के नियम:
-आक्सीजन सिलिंडरों को एलपीजी, एसिटिलीन या किसी भी प्रकार के तेल, ग्रीस और ईंधन से कम से कम छह मीटर दूर रखा जाना चाहिए।
-सिलिंडरों को सीधे धूप और बारिश से बचाने के लिए एक अच्छी हवादार, गैर-ज्वलनशील सामग्री से बने शेड के नीचे रखा जाना चाहिए।
-भरे हुए और खाली सिलिंडरों को अलग-अलग चिन्हित स्थानों पर रखा जाना चाहिए।
