नई दिल्ली- देशभर में नकली दवाइयों की सप्लाई करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पकड़े गए दोनों आरोपी महज आठवीं कक्षा तक पढ़े हुए हैं, लेकिन तकनीक का गलत इस्तेमाल कर वे वर्षों से अवैध कारोबार चला रहे थे। पूछताछ में मुख्य आरोपी गौरव भगत ने कबूल किया कि उसने यूट्यूब वीडियो देखकर नकली बेटनोवेट-सी और क्लोप-जी क्रीम तैयार करना सीखा।
गौरव ने बताया कि शुरुआती दौर में आनंद पर्वत इलाके से मशीनें खरीदी गईं और बाद में साथी विशाल गुप्ता के साथ मिलकर गांव में ही एक अवैध यूनिट स्थापित कर ली गई। यहीं से नकली दवाइयों का उत्पादन शुरू हुआ, जो करीब छह साल तक लगातार चलता रहा।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों को कच्चा माल अलग-अलग राज्यों से सप्लायर उपलब्ध कराते थे। उसी सामग्री से ट्यूब में भरकर नकली क्रीम तैयार की जाती थी। छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 358 किलो तैयार नकली दवाइयां बरामद की हैं।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि एक ट्यूब क्रीम बनाने में महज डेढ़ से दो रुपये का खर्च आता था, जिसे आरोपी होलसेलरों को 15 रुपये में बेच देते थे। इसके बाद यह दवाइयां बाजार में 70 से 100 रुपये तक में ग्राहकों को बेची जाती थीं, जिससे पूरे नेटवर्क को मोटा मुनाफा होता था।
आरोपियों ने बताया कि पहले वे खुद दवाइयों की सप्लाई से जुड़े थे। इसी दौरान किसी परिचित ने उन्हें नकली दवा बनाने का सुझाव दिया। इसके बाद गौरव ने इंटरनेट पर जानकारी जुटाई और दोनों ने मिलकर इस अवैध धंधे की नींव रख दी।
पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि इस कारोबार से आरोपियों ने अच्छी-खासी संपत्ति अर्जित कर ली है। अब उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है।
