
नोएडा: भारत में सेमीकंडक्टर बाजार के तेजी से बढ़ने की संभावना को देखते हुए उत्तर प्रदेश में चिप निर्माण से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों को बढ़ावा देने की तैयारी तेज हो गई है। नोएडा और आसपास के क्षेत्र में सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। प्रदेश सरकार की सेमीकंडक्टर नीति-2024 के तहत गौतमबुद्ध नगर को प्रदेश का पहला सेमीकंडक्टर-केंद्रित जिला घोषित किया गया है।
नीति के जरिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों को भूमि आवंटन, वित्तीय प्रोत्साहन और अन्य सुविधाओं में छूट देने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य प्रदेश में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के साथ भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की क्षमता को मजबूत करना है।
2030 तक 110 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
भारत में सेमीकंडक्टर की मांग लगातार बढ़ने की उम्मीद है। अनुमान के मुताबिक वर्ष 2030 तक देश में सेमीकंडक्टर बाजार का आकार करीब 110 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वर्तमान में ताइवान, चीन और अमेरिका सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रमुख वैश्विक निर्यातक हैं।
इसी बढ़ती मांग और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए नोएडा में चिप निर्माण से जुड़ी नई औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे देश में सेमीकंडक्टर उत्पादन बढ़ने और आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
गौतमबुद्ध नगर को बनाया गया पहला सेमीकंडक्टर-केंद्रित जिला
प्रदेश सरकार ने जनवरी 2024 में सेमीकंडक्टर नीति-2024 को मंजूरी दी थी। इसके तहत गौतमबुद्ध नगर को उत्तर प्रदेश का पहला सेमीकंडक्टर-केंद्रित जिला घोषित किया गया।
इस नीति के साथ उत्तर प्रदेश गुजरात, ओडिशा और तमिलनाडु के बाद सेमीकंडक्टर नीति लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बना। नीति के तहत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों को औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए भूमि और अन्य सुविधाओं में राहत देने की व्यवस्था की गई है।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (IDC) ने नोएडा प्राधिकरण की ओर से प्रस्तुत सेमीकंडक्टर नीति-2024 को लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
75 प्रतिशत तक सब्सिडी, 200 एकड़ तक भूमि पर लाभ
नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में भूमि की उपलब्धता सीमित होने के कारण दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र (DNGIR) के तहत विकसित किए जा रहे ‘नए नोएडा’ को सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रदेश सरकार की नीति के तहत उद्योगों को वित्तीय प्रोत्साहन देने के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। यह छूट 200 एकड़ तक की भूमि पर लागू होगी।
इसके अलावा सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे बड़े स्तर पर उत्पादन इकाइयों को स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पेटेंट के लिए भी मिलेगी वित्तीय सहायता
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट कराने वाली कंपनियों को भी आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट कराने वाली कंपनियों को 10 लाख रुपये तक, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट के लिए 20 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इसके साथ ही उद्योगों को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए सीएम इंटर्नशिप प्रोग्राम के जरिए सहयोग दिया जाएगा। प्रदेश के तकनीकी संस्थानों में सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़े विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे उद्योग की जरूरत के मुताबिक कुशल युवाओं को तैयार किया जा सके।
‘नया नोएडा’ में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन के अनुसार, सेमीकंडक्टर निर्माण करने वाली कंपनियों का निवेश नोएडा से लेकर ‘नया नोएडा’ यानी दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र तक फैल सकता है।
उनके मुताबिक, नोएडा प्राधिकरण और संबंधित संगठन इन औद्योगिक इकाइयों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनके संचालन में सहयोग की जिम्मेदारी निभाएंगे। नीति के तहत निर्धारित दिशा-निर्देशों का औद्योगिक क्षेत्रों में पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
आत्मनिर्भरता के साथ रोजगार और राजस्व बढ़ने की उम्मीद
सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार से भारत को चिप निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं, नोएडा और ‘नया नोएडा’ क्षेत्र में नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
