जंतर-मंतर हिंसा मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी, 2,873 उपद्रवियों की हुई पहचान

News Desk
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नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर काकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हुए भीषण हिंसक उपद्रव में शामिल 2,873 अपराधियों पर दिल्ली पुलिस जल्द ही बड़ी कार्रवाई शुरू करने जा रही है।

इन सभी की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) कैमरों के जरिए की गई है। पहचान के बाद दिल्ली की सभी 15 जिला पुलिस और विभिन्न यूनिटों ने इन अपराधियों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है।

सोमवार को जंतर-मंतर हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि जिन लोगों के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनके साथ पुलिस किसी भी तरह की रियायत न बरते। प्रदर्शन की आड़ में नई दिल्ली जिले में हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस की कई विशेष टीमें बनाई गई हैं, जो पिछले दो हफ्तों से गहन जांच में जुटी हैं।

सीधी धर-पकड़ से बच रही पुलिस 

सीसीटीवी फुटेज, इटरनेट मीडिया वीडियो, पुलिस वीडियोग्राफी, सीडीआर, डंप डाटा और स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो के जरिए पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने और केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देशों का इंतजार होने के कारण पुलिस फिलहाल सीधी धर-पकड़ से रुकी हुई है।

हालांकि, माना जा रहा है कि साक्ष्य एकत्र होते ही कुछ हफ्तों में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां शुरू हो जाएंगी।

जंतर-मंतर हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने कुल 21 प्राथमिकी दर्ज की हैं, जिनमें आपराधिक साजिश रचने से संबंधित केस की जांच स्पेशल सेल, दंगे और हिंसा से संबंधित 12 मामलों की जांच क्राइम ब्रांच और अन्य आठ मामले की जांच नई दिल्ली जिले की पांच थाना पुलिस करेगी।

आपराधिक साजिश की जांच कर रही स्पेशल सेल सीमापुरी के एक मोबाइल विक्रेता (बदला हुआ नाम: अशरफ) की भूमिका की भी जांच करेगी। उसने प्रदर्शनकारियों के लिए करीब एक महीने तक मुफ्त वेज बिरयानी का इंतजाम किया था।

पुलिस के अनुसार, महज 500 से 1,000 रुपये दैनिक कमाने वाले छोटे दुकानदार द्वारा इतने बड़े पैमाने पर भोजन कराने के पीछे फंडिंग का संदेह है। पूछताछ शुरू होने पर उस शख्स ने पुलिस उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। पुलिस का कहना है कि उसकी पूरी कुंडली खंगाली जा रही है और उसे भी संभवत: बख्शा नहीं जाएगा।

कार्रवाई से बचने के लिए पुलिस को बनाया निशाना

जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि कार्रवाई से बचने के लिए पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा था। जाफराबाद की एक महिला ने एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा पर एक युवती को थप्पड़ मारने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

हालांकि, जांच में साफ हुआ कि किसी भी प्रदर्शनकारी युवती ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी। याचिकाकर्ता महिला के खिलाफ पहले से दो आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से एक की जांच एडिशनल डीसीपी कर रहे थे।

कार्रवाई से बचने के लिए उसने झूठे आरोप लगाए थे। 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अलग से सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। पुलिस अब इस महिला के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

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