
गाजियाबाद। देख रहे हो विनोद … मेरे हिस्से में तीन बीघा जमीन है। एक बीघे जमीन की कीमत दो करोड़ रुपये है। छह करोड़ रुपये की जमीन का मालिक होते हुए भी खतौनी का अंश निर्धारण करते वक्त लेखपाल ने मुझे भूमिहीन बना दिया है। मेरे हिस्से में शून्य जमीन दर्शा दी गई। हां, रवि भाई लेकिन तुम अकेले नहीं हो।
यही हाल मेरा है। मेरे हिस्से में भी जमीन शून्य दर्शा दी गई है जबकि हकीकत में मैं तीन बीघे जमीन का मालिक हूं। यह वार्तालाप रईसपुर गांव में शुक्रवार को लगे शिविर के दौरान किसान रवि और विनोद कुर्सी पर बैठकर अपने हिस्से की जमीन के कागज एक दूसरे को दिखाते हुए करते मिले।
सौ से ज्यादा किसानों के साथ समस्या
सिर्फ रवि, विनोद ही नहीं रईसपुर गांव में रहने वाले सौ से अधिक किसानों की खतौनी के अंश निर्धारण में इस तरह की गलती लेखपाल सहित अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों द्वारा की गई है। इस वजह से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस तरह की गलती के कारण कोई किसान भूमिहीन हो गया तो किसी के हिस्से में मालिकाना हक से ज्यादा जमीन आ गई है। किसानों को इसका पता अंश निर्धारण के बाद जब खतौनी की नकल तहसील से निकलवाई तो पता चला।
ऐसे में जिन किसानों को भूमिहीन दर्शाया गया उनके तो पैरों तले जमीन ही खिसक की गई। मामले की शिकायत जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ से की गई और उनके निर्देश पर शुक्रवार को रईसपुर गांव में शिविर लगाकर अंश निर्धारण में हुई गलती के सुधार के लिए कार्य किया गया है।
एसडीएम सदर अजीत सिंह का कहना है कि का कहना है कि जल्द ही किसानों की समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
क्या बोले लोग
मेरे हिस्से में तीन बीघा जमीन है। इसके बावजूद खतौनी का अंश निर्धारण में गलती कर मेरे नाम शून्य जमीन कर दी गई। जब इसका पता चला तो मैं परेशान हो गया, आज कैंप में मैंने अंश निर्धारण में हुई गलती पर आपत्ति जताते हुए उसमें सुधार के लिए आवेदन किया है।
– विनोद, रईसपुर
अंश निर्धारण में गलती की गई है। सरकारी दस्तावेजों में मेेरे नाम शून्य जमीन कर दी गई जबकि मैं तीन बीघे खेत का मालिक हूं। मैंने शिविर में पहुंचकर अंश निर्धारण में हुई गलती में सुधार की मांग की है।
– रवि चौधरी, रईसपुर
मैं छह बीघे जमीन का मालिक हूं। अंश निर्धारण में तहसील प्रशासन की ओर से खतौनी में मेरा अंश जीरो कर दिया गया। इस लापरवाही के कारण सरकारी दस्तावेज में मैं भूमिहीन हो गया। अब इसमें सुधार के लिए लेखपाल को दस्तावेज सौंपे हैं।
– सुधीर चौधरी
खतौनी के पांच रकबे में मेरी हिस्सेदारी थी, चार खसरों में तो मेरा अंश निर्धारण कर दिया गया लेकिन पांचवें खसरे की खतौनी में मेरा अंश निर्धारण नहीं किया गया। शिविर में मैंने इसको लेकर आपत्ति जताते हए अंश निर्धारण में हुई गलती के सुधार की मांग की है।
– मदनपाल सिंह, रईसपुर
