साहिबाबाद। रक्षाबंधन पर भाई ने बहन की रक्षा करने का वादा निभाया। बहन की रक्षा के लिए वो सात समंदर पार से आया और ब्लड कैंसर से जूझ रही स्टेम सेल देकर बहन की जान बचा ली।
48 वर्षीय प्रीति वार्ष्णेय को जब जिंदगी बचाने वाले स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ी, तो उनके 50 वर्षीय भाई योगेश वार्ष्णेय ने एक पल भी नहीं सोचा।
फिलीपींस में रहने वाले योगेश हजारों किलोमीटर का सफर तय कर अपनी बहन के पास पहुंचे और उनके स्टेम सेल डोनर बने, जिससे प्रीति को जिंदगी का एक नया मौका मिला।
इंदिरापुरम निवासी दो बच्चों की मां प्रीति ब्लड कैंसर से जूझ रही थीं। उनकी चुनौती और भी गंभीर थी क्योंकि वह ली फ्रामेनी सिंड्रोम नाम की एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित थीं, जिससे कई तरह के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
उन्हें पहले ब्रेस्ट कैंसर भी हो चुका था, जिसका इलाज किया जा चुका था। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए परिवार ने वैशाली के मैक्स अस्पताल के कैंसर केयर के हेमेटो ऑन्कोलाजी और सेंटर फाॅर बोन मैरो ट्रांसप्लांट के एसोसिएट डायरेक्टर डाॅ. प्रदीप कुमार से परामर्श किया। जांच और मूल्यांकन के बाद स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की सलाह दी गई।
प्रीति की बेटी और उनके बड़े भाई हाफ मैच स्टेम सेल डोनर थे। इसके बाद योगेश आगे आए और जांच में वह प्रीति के लिए परफेक्ट मैच पाए गए। भाई द्वारा डोनेट किए गए स्टेम सेल से प्रीति का ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया।
आज दोनों भाई-बहन रिकवरी की राह पर हैं। प्रीति ट्रांसप्लांट के बाद सफलतापूर्वक स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं। प्रीति और उनके भाई योगेश की कहानी याद दिलाती है कि राखी का वादा कई बार शब्दों और परंपराओं से कहीं आगे बढ़कर जिंदगी बचाने का माध्यम बन सकता है।
अमेरिका से राखी बंधवाने पहुंचा भाई
रक्षाबंधन पर राखी बंधवाने दो साल बाद जब भाई अमेरिका से पहुंचा तो बहन के आंसू छलक पड़े। वसुंधरा सेक्टर- दो में शिक्षिका विनीता शर्मा से राखी बंधवाने न्यू जर्सी से उनके भाई सीए पल्लव शर्मा पहुंचे।
दो साल बाद भाई आया तो बहन की आंखें खुशी के आंसुओं से लबालब हो गईं। विनीता ने बताया कि भाई के साथ उनकी बहुत ही अच्छी बांडिंग है। अभी भी जब भी उसे कोई काम करना होता है तो उनसे जरूर सलाह लेता है। राखी बंधवाने के बाद भाई ने उपहार दिए।
