दिल्ली चिड़ियाघर में घड़ियाल संरक्षण की नई पहल

News Desk
3 Min Read

नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) ने गंभीर रूप से संकटग्रस्त घड़ियालों के संरक्षण के लिए कृत्रिम इन्क्यूबेशन तकनीक का सहारा लिया है। पिछले कई वर्षों से घड़ियाल प्रजनन में सफलता नहीं मिलने के बाद इस बार अंडों को नियंत्रित तापमान वाली विशेष इन्क्यूबेशन प्रणाली में रखा गया है। चिड़ियाघर प्रशासन को उम्मीद है कि करीब 45 दिनों में इसके नतीजे सामने आएंगे।

चिड़ियाघर के अधिकारियों के अनुसार, यहां घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुआ, रैट स्नेक और कोबरा जैसी प्रजातियों के मादा सरीसृप अपने अंडों को स्वयं नहीं सेते। इसलिए अंडों को सावधानीपूर्वक निकालकर वैज्ञानिक तरीके से कृत्रिम इन्क्यूबेशन प्रणाली में रखा जाता है, जहां तापमान और नमी का लगातार नियंत्रण किया जाता है। तापमान में मामूली बदलाव भी भ्रूण के विकास और अंडों के फूटने की संभावना को प्रभावित कर सकता है।

घड़ियालों के प्रजनन का अंतिम सफल प्रयास वर्ष 2010-11 में

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली चिड़ियाघर में घड़ियालों के प्रजनन का अंतिम सफल प्रयास वर्ष 2010-11 में हुआ था। उस समय 11 शावकों का जन्म हुआ था, लेकिन सभी कुछ ही दिनों में मर गए थे। इसके बाद पिछले 10 से 12 वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्तमान में चिड़ियाघर में केवल तीन घड़ियाल हैं, इसलिए इस बार का प्रजनन कार्यक्रम संरक्षण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चिड़ियाघर के विशेषज्ञों के अनुसार, नर घड़ियाल कई बार मादा द्वारा दिए गए अंडों को तोड़ देते हैं और अवसर मिलने पर नवजात बच्चों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही कारण है कि अंडों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाता है। इसके अलावा अंडे हटाने से मादा के दोबारा अंडे देने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिससे एक ही प्रजनन सत्र में अधिक संख्या में शावक प्राप्त किए जा सकते हैं।

कम तापमान पर नर शावकों के जन्म की संभावना बढ़ जाती है

अधिकारियों ने बताया कि इन्क्यूबेशन का तापमान केवल अंडों के विकास के लिए ही नहीं, बल्कि नवजात शावकों के लिंग निर्धारण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई सरीसृप प्रजातियों में अधिक तापमान पर मादा और कम तापमान पर नर शावकों के जन्म की संभावना बढ़ जाती है, हालांकि यह सभी प्रजातियों में समान नहीं होता।

चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि यदि इस बार कृत्रिम इन्क्यूबेशन सफल रहा तो कई वर्षों बाद दिल्ली चिड़ियाघर में घड़ियाल के शावकों का जन्म होगा, जो इस तरह की प्रजाति के संरक्षण कार्यक्रम के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।

Share This Article
Leave a Comment