28 साल से फरार हत्यारोपित ‘डॉ. झटका’ गिरफ्तार, दिल्ली क्राइम ब्रांच ने मध्य प्रदेश से दबोचा

News Desk
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नई दिल्ली। सोनीपत में हरियाणा पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में 28 वर्षों से फरार चल रहे भगोड़े अपराधी राजिंदर बैरागी उर्फ डॉ. झटका को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है। फरारी के दौरान राजिंदर मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले के मुंगावली में भाग गया था। वहां इसने अपना नाम बदलकर राजिंदर सिंह यादव रख लिया और 2003 में शादी कर ली।

पत्नी वहां के एक सरकारी अस्पताल में काम करती है। आरोपित ने वहां खुद को एक झोलाछाप डाक्टर के रूप में स्थापित किया, जिसके बाद स्थानीय लोग उसे डॉ. झटका कहने लगे थे। आरोपित पर दिल्ली और हरियाणा में हत्या के प्रयास के कई मामले और यूपी पुलिस की हिरासत से हथकड़ी समेत भागने के मामले में वांछित चल रहा था। इसके ऊपर दिल्ली, हरियाणा और यूपी में 10 मामले दर्ज हैं।

डीसीपी क्राइम ब्रांच चंदर कुमार सिंह के अनुसार क्राइम ब्रांच ने जनकपुरी थाने के 1997 के दो पुराने मामलों की जांच शुरू की तो राजिंदर के बारे में पता चला, जो लंबे समय से फरार था। 2008 में रोहिणी कोर्ट ने दो मामलों में उसे भगोड़ा घोषित कर रखा था। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने राजिंदर की तलाश शुरू की तो पता चला कि आरोपित ने मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेज बनाकर अपनी एक नई पहचान बना ली है।

सब-इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह व हवलदार संजीव कुमार की टीम ने सर्विलांस की मदद से उसकी लोकेशन पता की। लोकेशन ट्रेस होते ही एसीपी सुरेश कुमार व इंस्पेक्टर संजय कौशिक की टीम ने मध्यप्रदेश के अशोक नगर जिले के मुंगावली से उसे पांच अगस्त को दबोच लिया। राजिंदर को मुंगावली कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर द्वारका कोर्ट में पेश किया गया। पूछताछ के लिए इसे फिर से रिमांड पर लिया गया है।

पहले कबड्डी खिलाड़ी था राजिंदर

पूछताछ में पता चला कि राजिंदर पहले कबड्डी खिलाड़ी था। इसी दौरान वह अपराधियों के संपर्क में आया। 10 मई 1998 को सोनीपत के सैयां खेड़ा गांव में एक शादी समारोह के दौरान दुल्हन के परिवार से राजिंदर का झगड़ा हो गया था। इसपर राजिंदर और उसके पांच साथियों ने अंधाधुंध गोलियां चलाकर दुल्हन के चाचा और हरियाणा पुलिस के जवान जय भगवान की हत्या कर दी। की मौके पर ही मौत हो गई।

हथकड़ी समेत हुआ था फरार

थाना गन्नौर में सभी के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई। कुछ समय बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। 14 फरवरी 1999 को यूपी पुलिस जब राजिंदर को गाजियाबाद जेल से सोनीपत कोर्ट ले जा रही थी, तब वह गन्नौर रेलवे स्टेशन पर पुलिस को चकमा देकर हथकड़ी समेत फरार हो गया था।

भागने के बाद वह महाराष्ट्र के कोलाबा पहुंचा और एक साल तक केंद्रीय विद्यालय में संविदा पर शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में काम किया। आरोपित ने प्रापर्टी डीलिंग और ठेकेदारी भी की। इसने फर्जी तरीके से अधिवास प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और वोटर आइडी भी बनवा लिए थे।

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