दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान भारी बवाल: CEC के खिलाफ धरने पर बैठे लोगों पर हमला, ‘हिंदू रक्षा दल’ के प्रमुख पिंकी चौधरी ने ली जिम्मेदारी

News Desk
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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को हुए हिंसक हमलों के एक दिन बाद, रविवार को भी सेंट्रल दिल्ली और कनॉट प्लेस इलाकों में भगवा गमछे पहने और हाथ में लाठियां लिए कुछ लोगों को खुलेआम घूमते देखा गया। ये लोग प्रदर्शनकारियों को धमकाते नजर आए जबकि पुलिस इस दौरान निषेधाज्ञा लागू होने का दावा करती रही।

शनिवार की हिंसा और गिरफ्तारियां

शनिवार को दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) मार्ग और अन्य इलाकों में सीईसी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर भगवाधारी समूहों ने हमला कर दिया था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए शनिवार को हुए हमलों के सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। ये सभी खुद को दक्षिणपंथी संगठन ‘हिंदू रक्षा दल’ का सदस्य बता रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भड़काऊ कंटेंट

समाचार एजेंसी पीटीआई की छानबीन में गिरफ्तार दो आरोपियों के इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ और आपत्तिजनक वीडियो मिले, जिन्हें बाद में डिलीट कर दिया गया। इन वीडियो में कथित आरोपियों की रिहाई पर जश्न मनाते और ‘जिहादियों’ के खिलाफ धमकी देते हुए दिखाया गया था।

पिंकी चौधरी ने ली हमले की जिम्मेदारी

‘हिंदू रक्षा दल’ के प्रमुख और गाजियाबाद के रहने वाले पिंकी चौधरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर शनिवार को एक वीडियो शेयर कर इस हमले की खुली जिम्मेदारी ली थी। उसने अपने कार्यकर्ताओं को “सनातन धर्म के योद्धा” बताते हुए प्रदर्शनकारियों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। प्रदर्शन से पहले ही पिंकी चौधरी ने अपने समर्थकों से लाठियां लेकर जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की थी। वायरल हुए एक अन्य वीडियो में कुछ उपद्रवी एक पुरुष प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट करते और एक महिला को खींचकर जमीन पर गिराते हुए दिखाई दिए थे, जिसके बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा पर सवाल

भले ही पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन सोशल मीडिया और जमीन पर सामने आए दृश्यों से यह सवाल उठ रहा है कि धारा 163 (पूर्व में धारा 144) के तहत निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद लाठी-डंडों से लैस ये समूह पुलिस के सामने खुलेआम कैसे घूमते रहे। वीडियो में कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटी हुई है।

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