नई दिल्ली। नंदू गैंग से जुड़े मकोका मामले में आरोप तय करने को लेकर दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कोर्ट में अपनी अंतिम दलीलें पूरी कर लीं। मामले में पूर्व आप विधायक नरेश बाल्यान और फरार गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू समेत अन्य आरोपित हैं।
राउज एवेन्यू स्थित विशेष एमपी-एमएलए न्यायाधीश प्रशांत कुमार ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक अखंड प्रताप सिंह को तीन से चार पन्नों का लिखित सिनाप्सिस दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत अब 17 अगस्त को नरेश बाल्यान और कपिल सांगवान के अधिवक्ताओं की ओर से आरोप तय करने के मुद्दे पर दलीलें सुनेगी। दोनों के अधिवक्ताओं ने पक्ष रखने के लिए समय मांगा था। अन्य आरोपितों के अधिवक्ताओं ने मौखिक बहस नहीं की और कहा कि उनके मुवक्किलों को झूठा फंसाया गया है। अदालत ने उन्हें भी तीन से चार पन्नों में लिखित दलील दाखिल करने का समय दिया।
इससे पहले पांच अगस्त को अदालत ने फरार आरोपित उमेद सिंह को भगोड़ा (प्रोक्लेम्ड आफेंडर) घोषित किया था। दिल्ली पुलिस ने मामले में मकोका की धारा तीन और चार के तहत आरोपपत्र के साथ कई पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किए हैं। बाल्यान को चार दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था।
तीन अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट ने बाल्यान की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि जांच में सामने आई सामग्री प्रथम दृष्टया बाल्यान और नंदू के संगठित अपराध सिंडिकेट के बीच स्पष्ट संबंध दिखाती है। कोर्ट ने कहा था कि मकोका का इस्तेमाल प्रथम दृष्टया अनुचित नहीं है। साथ ही स्पष्ट किया कि मकोका के तहत कई आरोपपत्रों की आवश्यकता व्यक्ति-केंद्रित नहीं, बल्कि सिंडिकेट-केंद्रित है।

