नई दिल्ली। IIT दिल्ली में एमएससी भौतिकी के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद परिसर में छात्रों का प्रदर्शन छठवें दिन भी लगातार जारी है।
घटना से आहत छात्र प्रशासन से निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और छात्र कल्याण से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
विभाग से सहयोग मिला, अन्य प्रक्रियाओं में हुई परेशानी
ऋषिकेश के एक क्लासमेट ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि भौतिकी विभाग की ओर से उन्हें सहयोग मिला था। विभागाध्यक्ष ने उनकी मदद की और सेमेस्टर ड्राॅप की अनुमति भी दी थी।
हालांकि, छात्र के अनुसार अन्य विभागों से जुड़ी प्रक्रियाओं और समस्याओं के कारण ऋषिकेश को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश अलग-अलग स्तर पर मदद के लिए भटकते रहे और आखिरकार उनकी मौत हो गई।
अस्पताल से लौटने के बाद हुई थी आखिरी बातचीत
क्लासमेट ने भावुक होकर बताया कि अस्पताल से ठीक होकर लौटने के बाद ऋषिकेश से उनकी बातचीत हुई थी। यह उनकी आखिरी बातचीत थी। ऋषिकेश ने उस समय कहा था कि अगर उन्हें सेमेस्टर ड्रॉप मिल जाए तो वह बाकी पेपर निकाल लेंगे और सब ठीक हो जाएगा।
क्लासमेट ने कहा कि पिछले कई दिनों से वह इस घटना को लेकर खुद को संभाल नहीं पा रहे हैं। छात्र का कहना है कि प्रशासन ने पिछले वर्षों में कई प्रोटोकाल और व्यवस्थाएं बनाई हैं, लेकिन उनका प्रभाव जमीन पर नजर नहीं आता।
डीन के इस्तीफे और एक करोड़ मुआवजे की मांग
उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्थाएं सही तरीके से काम कर रही होतीं तो छात्रों को ऐसी परिस्थितियों से नहीं गुजरना पड़ता। प्रदर्शनकारी छात्र का कहना है कि वह पहले दिन से आंदोलन में शामिल है और मांगें पूरी होने तक धरने पर बैठा रहेगा।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने डीन और एसोसिएट डीन के इस्तीफे, मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच तथा ऋषिकेश के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है।
एक छात्र ने कहा कि मुआवजे की राशि परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि छात्रों के हित में भी उपयोग की जा सकती है। छात्रों के मुताबिक ऋषिकेश की मां की इच्छा है कि यदि मुआवजा मिलता है तो उससे परिसर में छात्रों के लिए हास्टल जैसी सुविधा विकसित की जाए।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
छात्रों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन प्रदर्शन में अलग-अलग पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी शामिल हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, प्रदर्शन जारी रहेगा।
