
नई दिल्ली। एशियाई खेलों के लिए ड्रेसेज टीम के चयन से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) के सीईओ रघुराम अय्यर को शुक्रवार को अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने उक्त आदेश तब दिया जब भारतीय घुड़सवारी महासंघ (ईएफआई) को चलाने वाली आइओए की एड-हाक कमेटी ने चुने गए एथलीटों की रैंकिंग का मूल्यांकन करने के लिए एक स्वतंत्र एक्सपर्ट नियुक्त करने के केंद्र के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
घुड़सवार अनुष अग्रवाल और सुदीप्ति हजेला ने चयन में दखल देने से इन्कार करने वाले एकल पीठ के 29 जून के फैसले को चुनौती दी है। पीठ ने कहा कि केंद्र का प्रस्ताव पहली नजर में स्वागत योग्य बताते हुए ईएफआइ की एड-हाक कमेटी द्वारा अपीलों का मेरिट के आधार पर विरोध करने के रुख पर नाराजगी जताई।
पीठ ने कहा कि एड-हाॅक कमेटी इसे ईगो का मुद्दा क्यों बना रही है? पीठ ने चयन समिति के सदस्य और वकील कपिल मोदी के पेश होने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। अनुष अग्रवाल ने मोदी पर एड-हाक कमेटी की ओर से उनके बीच चल रहे एक मुकदमे के कारण पक्षपात का आरोप लगाया था।
हितों के टकराव को देखते हुए पीठ ने कहा कि कपिल मोदी को इस मामले में वकील के तौर पर पेश नहीं होना चाहिए था। पीठ ने कहा कि अगर कपिल मोदी चयन प्रक्रिया से अलग हो गए थे, तो आपको यहां भी अलग हो जाना चाहिए था। पीठ ने कहा कि आइओए ने 27 मार्च 2026 को एड-हाॅक कमेटी नियुक्त की थी और तीन महीने के कार्यकाल अब खत्म हो चुका है।
उक्त तथ्यों को देखते हुए पीठ ने आईओए के सीईओ को पेश होने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी कहा कि अगर सीईओ उपलब्ध नहीं हैं तो आइओए अध्यक्ष किसी दूसरे अधिकारी को नामित कर सकते हैं। यह मामला जापान में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारत की ड्रेसेज टीम के चयन से जुड़ा है।
