नई दिल्ली। लोक कल्याण मार्ग स्थित दिल्ली रेस क्लब की 84 एकड़ बेशकीमती जमीन पर केंद्र सरकार का कब्जा लेने का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने मंगलवार को क्लब की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें बेदखली की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई थी।
पटियाला हाउस स्थित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने स्पष्ट किया कि क्लब का 1926 में दिया गया पट्टा 31 दिसंबर 1994 को समाप्त हो चुका था और इसके बाद उसका नवीनीकरण नहीं हुआ।
किराये का करता रहा भुगतान
क्लब ने दलील दी थी कि वह लंबे समय से नियमित रूप से किराये का भुगतान करता रहा है, इसलिए इसे पट्टे की अवधि बढ़ाने के तौर पर माना जाना चाहिए। हालांकि, न्यायाधीश पीतांबर दत्त ने कहा कि पट्टा समाप्त होने के बाद केवल किराये का भुगतान करने से पट्टे का नवीनीकरण नहीं माना जा सकता।
क्लब ने वर्ष 2013 में करीब 3.5 करोड़ रुपये के भुगतान का भी हवाला दिया था। उसका दावा था कि यह राशि पट्टे की अवधि बढ़ाने के लिए दी गई थी। अदालत ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया।
अदालत के मुताबिक, यह राशि भविष्य के किराये या पट्टा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि चार जुलाई 2013 तक की क्षतिपूर्ति के रूप में वसूल की गई थी।
कोई दलील नहीं रखी
अदालत ने यह भी कहा कि क्लब को कई अवसर दिए गए, लेकिन उसने संपदा अधिकारी के समक्ष न तो कोई जवाब दाखिल किया और न ही कोई दलील रखी। ऐसे में संपदा अधिकारी ने उपलब्ध दस्तावेजों और सामग्री के आधार पर 11 अगस्त 2026 को आदेश पारित किया।
केंद्र सरकार ने अदालत में कहा था कि 31 दिसंबर 1994 को पट्टा खत्म होने के बाद उसका नवीनीकरण नहीं हुआ, इसलिए क्लब का जमीन पर कब्जा अवैध है। केंद्र ने मार्च में क्लब को जमीन का शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने का नोटिस जारी किया था। सरकार ने जमीन को सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यक बताया था।
कार्रवाई पर लगा दी गई थी रोक
इसके बाद 17 अप्रैल को सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारी) अधिनियम के तहत क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू की गई। क्लब ने इस नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट की एकल पीठ में चुनौती दी थी। एकल पीठ ने 30 जुलाई तक आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
केंद्र सरकार ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की, जहां उसकी अपील स्वीकार कर ली गई। अब अंतरिम राहत की मांग खारिज होने के बाद केंद्र के लिए जमीन का कब्जा लेने की कार्रवाई आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
