
नई दिल्ली- लंदन में कार्यरत एक आईटी विशेषज्ञ तलाक की प्रक्रिया के बीच एक अनोखे विवाद में फँस गया। आरोप है कि मामले की पैरवी कर रही महिला वकील और उस व्यक्ति के बीच कोर्ट कार्यवाही के दौरान नजदीकियां बढ़ीं। बाद में जब पति-पत्नी के बीच संबंध सामान्य होने के संकेत दिखाई देने लगे, तो वकील ने उस व्यक्ति पर शादी का भरोसा दिलाकर शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करा दिया।
इस शिकायत के बाद व्यक्ति ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत की मांग की, लेकिन सफलता न मिलने पर उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अगुवाई वाली दो सदस्यीय पीठ ने आईटी प्रोफेशनल को अंतरिम राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने तर्क दिया कि उक्त महिला वकील ने अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी इसी प्रकार की शिकायतें दर्ज करवाई हैं। उन्होंने बताया कि तलाक केस पिछले तीन वर्षों से लंबित है और अब दंपत्ति के बीच सुधार की स्थिति बन रही है, जिसके बाद यह विवाद अचानक खड़ा किया गया है।
पीठ ने सुनवाई के दौरान महिला वकील से कड़ा सवाल भी किया। जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की, “आप कानून जानने वाली व्यक्ति हैं। जब तलाक की कार्यवाही चल रही है, तो विवाह की कोई संभावना नहीं होती—फिर भी आपने ऐसा आरोप लगाया है।”
मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 12 दिसंबर की तारीख तय की है।
