नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार ने दावा किया है कि वह चार मंजिल से अतिरिक्त हुए निर्माणों को सील करेगी। लेकिन उसके लिए यह भी करना चुनौती पूर्ण है। क्योंकि संसद और केंद्र सरकार के कानून ही इसमें बाधा बनते हैं।
केंद्र सरकार ने जहां 1500 अनधिकृत कालोनियों को जैसा है वैसे के आधार पर नियमित करने की घोषणा कर दी है। तो ऐसे में किस कानून के तहत इन्हें गिराया जाएगा यह सवाल भी निगम अधिकारियों को चिंता में डाल रहा है।
इतना ही नहीं दिल्ली में अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाला दिल्ली स्पेशल प्रोविजन कानून जिससे तहत 30 जून 2014 तक के हुए अवैध निर्माण को संरक्षण प्राप्त हैं तो उसे कैसे गिराया जाएगा।
दिल्ली में स्पेशल प्रोविजन एक्ट
एमसीडी की निर्माण समिति के चेयरमैन रहे जगदीश ममगांई कहते हैं कि दिल्ली सैदुलाजाब और हौजरानी हादसे के बाद भी सरकार ने यही दावे किए थे। अगर, सरकार कार्रवाई कर सकती है तो अभी तक क्यों नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिखावटी बाते हैं क्योंकि दिल्ली में कानून ऐसे हैं जिसमें सरकार के इस दावों को जमीन पर उतारने में दिक्कत होगी। भले ही एजेंसियां दवाब में कार्रवाई कर दें और सील भी कर दें। लेकिन जब यह मामले कोर्ट में जाएंगे तो कार्रवाई करने वाले अधिकारी खुद इसकी जद में आ जाएंगे।
दिल्ली में स्पेशल प्रोविजन एक्ट संसद से पारित हैं जो कि अवैध निर्माण को संरक्षण देता है। अगर, 30 जून 2014 तक का निर्माण है और उसके बाद कोई निर्माण नहीं कर रखा है तो उसे भी सरकार या एमसीडी नहीं गिरा सकती है।
एमसीडी ने दिए कारण बताओ नोटिस
एमसीडी ने सत्य निकेतन की घटना के बाद चार इमारतों को रविवार को ही खतरनाक घोषित कर दिया था। इसमें चार इमारतों में घटना के साथ वाली इमारत पी-13 और 15 के साथ संपत्ति संख्या 81-82 हैं। इन इमारतों को तीन दिन के अंदर संपत्ति मालिक को स्वयं गिराना होगा।
वहीं, सोमवार को भी एमसीडी ने सैदुलाजाब की सात इमारतों पर कार्रवाई की है। इसमें एक इमारत तो ध्वस्त किया गया है जबकि छह इमारतों को अवैध निर्माण पर सीलिंग नोटिस जारी किए गए हैं।
निगम के अनुसार पिछले तीन महीनों में 960 इमारतों को गिराया गया, 407 इमारतों को सील किया गया और 1500 इमारतों को सील करने तथा गिराने के लिए नोटिस जारी किए गए।
