
गाजियाबाद। लाजपत नगर निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग को साइबर ठगों ने 21 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 81.37 लाख रुपये ठग लिए। आरोपितों ने खुद को पुलिस,सीबीआइ, एटीएस और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर वीडिय मनी लांड्रिंग का आरोपित बताकर ठगी की है।
पीड़ित को उसके आधार कार्ड के इस्तेमाल और बैंक खातों में संदिग्ध रकम जमा होने की बात बताकर जांच का डर दिखाया गया। ठगों ने कहा कि खातों में जमा रकम को बताए गए खातों में स्थानांतरित करने के बाद जांच पूरी होने पर ब्याज समेत वापस कर दिया जाएगा।
डर से पीड़ित ने भेज दी रकम
डर के कारण पीड़ित ने अलग-अलग खातों से 11 बार आरटीजीएस के जरिए रकम भेज दी। मामले में पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने सोमवार को केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
लाजपत नगर निवासी राजीव नियोगी निजी कंपनी से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने पुलिस को शिकायत देकर बताया कि एक अगस्त को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से उनके पास फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को पुलिस विभाग का अधिकारी बताया और कहा कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट है।
पीड़ित ने बीमारी का हवाला देते हुए मामला साहिबाबाद थाने में स्थानांतरित करने की बात कही तो आरोपित ने केस महाराष्ट्र स्थानांतरित करने की बात कही। इसके बाद राजेश कुमार नाम से व्यक्ति ने वाट्सएप पर संपर्क किया और खुद को सीबीआइ का सर्विलांस अधिकारी बताया।
जांच के नाम पर निगरानी में रखा
वीडियो काल पर बातचीत के दौरान आरोपितों ने उनके आधार कार्ड और पैन कार्ड दिखाए और कहा कि उनके दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही उनके नाम पर कई बैंक खाते होने और उनमें संदिग्ध लेनदेन की जांच चलने का दावा किया।
पीड़ित को जांच के नाम पर धमकाकर वीडियो काल पर ही निगरानी में रखा गया और हर घंटे रिपोर्ट करने को कहा गया। उन्हें धमकाया गया कि निर्देश नहीं मानने पर पूरे परिवार को हिरासत में ले लिया जाएगा। डर के कारण पीड़ित ने एक अगस्त से 20 अगस्त के बीच कुल 11 बार रकम ट्रांसफर की।
पीड़ित की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच कराई जा रही है। जिन खातों में रुपये ट्रांसफर हुए हैं उनकी जानकारी ली जा रही है। शीघ्र आरोपितों को गिरफ्तार किया जाएगा।
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अमित सक्सेना, एसीपी क्राइम
