“आख़िर कौन रच रहा है साज़िश?” सेक्स रैकेट केस में निर्दोष कसाना का नाम उछालने के पीछे कौन!

Amit
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गाजियाबाद। कौशांबी क्षेत्र में सामने आए कथित सेक्स रैकेट मामले के बाद जहां पुलिस की कार्रवाई सुर्खियों में रही, वहीं अब इस पूरे प्रकरण को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कुछ जगहों पर निर्दोष कसाना का नाम इस मामले से जोड़कर चर्चा की जा रही है, जिस पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि निर्दोष कसाना का इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी उनका नाम उछालकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस कार्रवाई में क्या सामने आया

पुलिस के अनुसार 11 फरवरी 2026 को कौशांबी थाना क्षेत्र के एक होटल में छापेमारी की गई थी। छापेमारी के दौरान कथित रूप से चल रही अनैतिक गतिविधियों का खुलासा हुआ।

कार्रवाई में 11 महिलाओं को रेस्क्यू किया गया और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

एफआईआर के अनुसार इस मामले में अंकित चौहान, सुनील और होटल मैनेजर राहुल शर्मा के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस रिकॉर्ड में इन्हीं व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई दर्ज है।

पुरानी रंजिश में नाम घसीटने का आरोप

निर्दोष कसाना से जुड़े लोगों का आरोप है कि जिन व्यक्तियों के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई है, वही लोग पुरानी रंजिश के चलते निर्दोष कसाना का नाम इस घटना से जोड़कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

उनका कहना है कि घटना के समय मौके पर निर्दोष कसाना मौजूद नहीं थे, और अब तक जांच में ऐसा कोई भी व्हाट्सऐप चैट या अन्य डिजिटल सबूत सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि इस घटना में उनका किसी भी तरह का हाथ था।

अग्रिम जमानत भी मिल चुकी

मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, अदालत ने भी उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए 25 फरवरी 2026 को निर्दोष कसाना को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) प्रदान कर दी है। इसे उनके पक्ष में एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है।

सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप

निर्दोष कसाना से जुड़े लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से समाज में सक्रिय हैं और उनकी एक साफ-सुथरी छवि रही है। ऐसे में बिना किसी प्रमाण के उनका नाम इस तरह के संवेदनशील मामले से जोड़ना गलत है।

उनका कहना है कि इस तरह की खबरें और अफवाहें न केवल किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि उसके परिवार और सामाजिक जीवन पर भी गहरा असर डालती हैं।

जिम्मेदार रिपोर्टिंग की मांग

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मीडिया से भी जिम्मेदारी के साथ खबरें प्रकाशित करने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति का नाम तभी सार्वजनिक किया जाना चाहिए जब उसके खिलाफ आधिकारिक रूप से ठोस प्रमाण या आरोप हों।

लोगों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी और यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि निर्दोष कसाना को अनावश्यक रूप से इस मामले में घसीटा जा रहा है।

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